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Tulsidas dohe: तुलसीदास जयंती 2025, इन दोहों को जीवन में अपनाएं, सफलता कदम चूमेगी!

On: जुलाई 30, 2025 7:21 अपराह्न
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Tulsidas dohe: तुलसीदास जयंती 2025, इन दोहों को जीवन में अपनाएं, सफलता कदम चूमेगी!
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Tulsidas dohe Tulsidas quotes for life: गोस्वामी तुलसीदास सिर्फ एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के अमर स्तंभ हैं। उनके लिखे दोहे और कविताएं न सिर्फ साहित्य की धरोहर हैं, बल्कि आज भी इंसान को जीवन जीने की राह दिखाती हैं। चाहे धर्म की बात हो या नैतिकता की तुलसीदास जी के दोहे हर पीढ़ी को कुछ नया सिखाते हैं।

कब मनाई जाती है तुलसीदास जयंती?

हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को तुलसीदास जयंती मनाई जाती है। इस बार तुलसीदास जयंती 31 जुलाई 2025 को है। इस दिन पूरे भारत में धार्मिक कार्यक्रम, रामायण पाठ और कीर्तन का आयोजन होता है।

कौन थे गोस्वामी तुलसीदास?

तुलसीदास जी को भारतीय साहित्य में एक महान संत-कवि माना जाता है। उन्होंने रामचरित मानस जैसी अमर रचना की, जिसने उन्हें अमरत्व प्रदान किया। रामचरित मानस में उन्होंने श्रीराम के आदर्श जीवन का वर्णन किया है, जिसे पढ़कर आज भी लोग भाव-विभोर हो जाते हैं।

कहा जाता है कि तुलसीदास जी को एक स्वप्न में श्रीराम के दर्शन हुए थे, जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। इसके बाद उन्होंने हनुमान बाहुक, कवितावली, विनय पत्रिका, पार्वती मंगल और रामलला नाचू जैसी कई रचनाएं कीं।

आज भी प्रेरणा देते हैं तुलसीदास के दोहे

तुलसीदास जी के दोहे इतने सरल हैं कि आम आदमी भी उन्हें समझ सके, और इतने गहरे हैं कि पूरी जिंदगी को बदल दें। इनके जरिए उन्होंने समाज को नैतिकता, प्रेम, भक्ति और संयम का पाठ पढ़ाया।

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Tulsidas dohe

“संतन को कहां सीकरी सों काम।”

अर्थ – संतों को सत्ता या राजनीति से कोई मतलब नहीं होता।

“तुलसी इस संसार में भांति-भांति के लोग।
सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग॥”

अर्थ – हर व्यक्ति अलग है, लेकिन सबके साथ प्रेम से मिलिए।

“पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचरहिं ते नर न घनेरे।”

अर्थ – उपदेश देना आसान है, पर उसे खुद अमल में लाना मुश्किल।

इन दोहों की खासियत यही है कि ये हर युग में प्रासंगिक हैं। चाहे छात्र हों, कामकाजी लोग हों या गृहस्थ जीवन में उलझे व्यक्ति तुलसीदास के दोहे सबको रास्ता दिखाते हैं। उनमें न तो आडंबर है, न ही उलझी हुई भाषा सिर्फ सच्चाई और सीधी सीख है।

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Tulsidas ke Dohe

राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर।

अर्थ: तुलसीदासजी कहते हैं यदि तुम कभी भी कल्याण चाहते हो तो अपनी वाणी पर नियंत्रण रखो। गलत शब्द बोलने के बजाय राम नाम का जाप करते रहो। राम नाम का जाप करने से जग का कल्याण होता है।

तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक ।

साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसे एक ।

अर्थ – गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि कठिन समय में घबराना नहीं चाहिए और हार नहीं माननी चाहिए। ऐसी परिस्थितियों से अच्छे कर्म, विवेक और बुद्धि से निपटना चाहिए। साहस और अच्छे कर्म ही कठिन परिस्थितियों में आपका साथ दे सकते हैं।

नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।

जो सिमरत भयो भाँग ते तुलसी तुलसीदास।

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अर्थ – राम नाम का जाप करने से मन साफ रहता है। काम शुरू करने से पहले राम का नाम लें। राम का नाम जपने से तुलसीदास जी भी स्वयं को तुलसी के पौधे के समान पवित्र मानने लगे।

तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।

सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।

अर्थ – तुलसीदासजी कहते हैं कि सुंदर रूप देखकर मूर्ख ही नहीं साधु भी धोखा खा जाते हैं। उदाहरण के लिए, मोर की बनावट बेहद ही सुंदर होती है पर वो सांप का खाते हैं।

तुलसीदास जयंती पर रामचरित मानस का पाठ करें, श्रीराम और हनुमान जी की पूजा करें और तुलसीदास जी के दोहों को जीवन में उतारने का संकल्प लें। इससे न सिर्फ मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि जीवन में हर संकट से लड़ने की शक्ति भी।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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