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Varuthini Ekadashi 2025: वरुथिनी एकादशी 24 अप्रैल को रखें व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम

On: April 23, 2025 7:25 AM
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Varuthini Ekadashi 2025: वरुथिनी एकादशी 24 अप्रैल को रखें व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम
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Varuthini Ekadashi 2025 Shubh Muhurat And Puja Vidhi in Hindi: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। वैशाख माह की वरुथिनी एकादशी भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी मां को समर्पित है, जिसके पालन से सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इस साल 24 अप्रैल 2025 को वरुथिनी एकादशी मनाई जाएगी। अगर आप इस पवित्र व्रत को रखने की योजना बना रहे हैं, तो शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियमों को जानना जरूरी है। आइए, इस लेख में वरुथिनी एकादशी की पूरी जानकारी विस्तार से समझते हैं।

Varuthini Ekadashi 2025: शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अप्रैल 2025 को शाम 4:43 बजे शुरू होगी और 24 अप्रैल को दोपहर 2:32 बजे समाप्त होगी। हिंदू परंपरा में उदया तिथि का विशेष महत्व है, इसलिए वरुथिनी एकादशी का व्रत 24 अप्रैल को रखा जाएगा। व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) 25 अप्रैल, शुक्रवार को किया जाएगा। इस शुभ मुहूर्त में पूजा और व्रत के संकल्प से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

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वरुथिनी एकादशी की पूजा विधि

वरुथिनी एकादशी का व्रत और पूजा भक्ति और श्रद्धा के साथ करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। पूजा शुरू करने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। एक साफ चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। मूर्ति का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं। भगवान को पीले वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार करें। पीला चंदन और रोली का तिलक लगाएं, पीले फूल अर्पित करें। तिल के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। भोग के रूप में केसर की खीर, पंचामृत और पंजीरी चढ़ाएं। इसके बाद वरुथिनी एकादशी की कथा पढ़ें, आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

वरुथिनी एकादशी के नियम

वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने वालों को कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, इसलिए जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य सामग्री दान करें। किसी को अपशब्द न बोलें और मांस-मछली जैसे तामसिक भोजन से बचें। व्रत के दौरान सोने से भी परहेज करें, ताकि मन और शरीर सात्विक रहे। इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

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वरुथिनी एकादशी का महत्व

वरुथिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने वाला व्यक्ति न केवल सांसारिक सुख प्राप्त करता है, बल्कि मोक्ष की ओर भी अग्रसर होता है। यह व्रत नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और परिवार में समृद्धि लाता है। वैशाख माह की यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने जीवन में सौभाग्य और शांति की कामना करते हैं।

वरुथिनी एकादशी के दिन पूजा स्थल को साफ रखें और सात्विक भोजन करें। अगर संभव हो, तो मंदिर में जाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। तुलसी के पौधे की सेवा और तुलसी मंत्र का जाप भी इस दिन विशेष फलदायी है। व्रत के दौरान सकारात्मक विचार रखें और क्रोध या नकारात्मकता से बचें।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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