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Agriculture News: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: कृषि सखियां बनेंगी किसानों की नई उम्मीद

On: May 18, 2025 9:00 AM
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Agriculture News: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: कृषि सखियां बनेंगी किसानों की नई उम्मीद
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Agriculture News: Promotion of natural farming: Krishi Sakhis will become the new hope of farmers: बिहार में खेती को नई दिशा देने के लिए एक अनूठी पहल शुरू हुई है। प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कृषि सखी योजना शुरू की है, जो न केवल किसानों को पर्यावरण-अनुकूल खेती के गुर सिखाएगी,

बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह योजना न केवल खेती को टिकाऊ बनाएगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित करने में भी मदद करेगी। आइए, इस योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कृषि सखियां: प्राकृतिक खेती की नई मशाल Agriculture News

कृषि सखियां बिहार के गाँव-गाँव में प्राकृतिक खेती (Prakritik Kheti) को जन-जन तक पहुँचाने का काम करेंगी। सरकार ने 400 क्लस्टरों में 800 कृषि सखियों को नियुक्त करने का फैसला किया है।

ये सखियां हर महीने 16 दिन काम करेंगी और किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके सिखाएँगी। इसके लिए उन्हें प्रतिदिन 300 रुपये का मानदेय और 200 रुपये का यात्रा भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें मोबाइल डिवाइस के लिए सहायता राशि भी प्रदान की जाएगी, ताकि वे किसानों को तुरंत सलाह दे सकें।

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कृषि सखियों का मुख्य काम किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना, उनका पंजीकरण कराना, प्रशिक्षण देना और फसल चक्र के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना है। ये सखियां किसान मास्टर प्रशिक्षकों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों की मदद से प्रशिक्षित की जाएँगी।

किसानों के लिए सुनहरा अवसर

इस योजना के तहत बिहार के 50,000 पंजीकृत किसानों को प्राकृतिक खेती (Sustainable Agriculture) का लाभ मिलेगा। सरकार प्रत्येक किसान को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4,000 रुपये का प्रोत्साहन देगी।

वर्तमान में 20,000 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, 266 भारतीय प्राकृतिक जैव-उपादान संसाधन केंद्र स्थापित किए जाएँगे, जो किसानों को जैविक खाद और अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

लखपति दीदी का सपना, कृषि सखी की उड़ान

कृषि सखी योजना ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 3 करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत कृषि सखियों को 56 दिनों का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है,

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जिसमें भूमि की तैयारी, फसल कटाई, मृदा स्वास्थ्य (Soil Health), बीज बैंक प्रबंधन, एकीकृत कृषि प्रणाली, और जैव-इनपुट की तैयारी जैसे विषय शामिल हैं। ये सखियां न केवल खेती के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करती हैं, बल्कि सामुदायिक स्तर पर विश्वसनीय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उभरती हैं।

देशभर में फैल रही है यह पहल

बिहार के साथ-साथ गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश और मेघालय जैसे 12 राज्यों में भी कृषि सखी कार्यक्रम शुरू हो चुका है। यह पहल प्राकृतिक खेती को एक जन आंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्राकृतिक खेती का भविष्य

प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह किसानों की लागत को भी कम करती है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करके यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है और लंबे समय तक टिकाऊ खेती को सुनिश्चित करती है। कृषि सखियों के माध्यम से सरकार इस बदलाव को गाँव-गाँव तक ले जाना चाहती है।

इस योजना के तहत आयोजित होने वाले 2,800 कार्यक्रमों में किसान, पंचायत प्रतिनिधि, और स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ हिस्सा लेंगी। प्रत्येक कार्यक्रम में 50 प्रतिभागी शामिल होंगे, जो प्राकृतिक खेती (Organic Farming) के लाभों को समझेंगे और इसे अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

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 एक नई शुरुआत

कृषि सखी योजना न केवल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में भी योगदान दे रही है।

यह योजना पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के बीच एक संतुलन स्थापित करती है। यदि आप भी अपने खेतों में प्राकृतिक खेती शुरू करना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें और इस क्रांतिकारी योजना का हिस्सा बनें।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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