Barley Variety new hull-less barley: करनाल | भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के वैज्ञानिकों ने पूरे 37 साल बाद इतिहास रच दिया है। लंबी रिसर्च के बाद उन्होंने छिलका रहित जौ की नई किस्म DWRB-223 विकसित की है। ये जौ न सिर्फ स्वादिष्ट चपाती, पूड़ी और दलिया बनाएगा, बल्कि सेहत के लिए भी रामबाण साबित होगा।
सेहत के लिए वरदान है नई किस्म Barley Variety
इस नई जौ में बीटा-ग्लूकॉन की भरपूर मात्रा है, जो डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, दिल की बीमारी और लीवर की समस्या को कंट्रोल करती है। ये आंतों के घाव भरती है, दिमाग की सुरक्षा करती है और किडनी में पथरी बनने नहीं देती। संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी कहते हैं कि ये जौ न्यूरो-प्रोटेक्टर और लिवर-सेवर की तरह काम करता है।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि DWRB-223 में बीटा-ग्लूकॉन 6-8% और प्रोटीन 12% से ज्यादा है। ग्लूटन गेहूं से आधा है, इसलिए ग्लूटन एलर्जी वालों के लिए भी परफेक्ट। आयरन 44 PPM और जिंक 48 PPM – ये अब तक की सभी गेहूं-जौ किस्मों में सबसे ज्यादा है।
किसानों के लिए भी मुनाफे की फसल
ये किस्म हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में उगाने के लिए मंजूर हो चुकी है। पैदावार शानदार है और मार्केट में इसका भाव भी ऊंचा मिलेगा। स्वास्थ्य के इतने फायदों के चलते लोग इसे हाथों-हाथ लेंगे। 1989 के बाद पहली बार छिलका रहित जौ की नई किस्म आई है, इसलिए किसानों के लिए ये सोने पर सुहागा वाली फसल साबित होगी।












