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Bottle Gourd Farming: फतेहाबाद के किसान ने उगाई 6 फुट लंबी लौकी! देखकर दंग रह जाएंगे

On: November 21, 2025 9:15 AM
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Bottle Gourd Farming: फतेहाबाद के किसान ने उगाई 6 फुट लंबी लौकी! देखकर दंग रह जाएंगे
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Bottle Gourd Farming: फतेहाबाद | हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीति का असर अब साफ नजर आने लगा है। किसान परम्परागत खेती छोड़कर ऑर्गेनिक और बागवानी खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी बदलाव की मिसाल हैं फतेहाबाद जिले के गांव भूथनखुर्द के किसान रवि पुनिया, जो इन दिनों हर जगह चर्चा में हैं।

रवि पुनिया ने अपने खेत में 6 फुट लंबी लौकी उगाकर सभी को हैरान कर दिया है। पिछले तीन साल से वे लौकी की बिजाई कर रहे हैं और इसके बीज भी तैयार करते हैं, जो हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय तक पहुंच रहे हैं।

शिवानी किस्म की लौकी का कमाल Bottle Gourd Farming

रवि पुनिया बताते हैं कि आम लौकी की लंबाई डेढ़ से दो फुट होती है। लेकिन शिवानी किस्म की लौकी 6 से 7 फुट तक बढ़ जाती है।

इसकी खासियत यह है कि—

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3 फुट का हिस्सा सब्जी बनाने में उपयोग होता है।

4 से 4.5 फुट का हिस्सा जूस बनाने में काम आता है।

बीच के हिस्से से बीज तैयार किए जाते हैं, जो अच्छे दामों पर बिकते हैं।

एकड़ से लाखों की कमाई

रवि कहते हैं कि वे प्रति एकड़ 5 से 6 लाख रुपये तक कमा लेते हैं। उनका मानना है कि मचान विधि से खेती करने पर सब्जियों और फलों का उत्पादन 600 से 900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।

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बीएससी एग्रीकल्चर और एमए करने के बाद रवि ने कुछ समय नौकरी भी की, लेकिन फिर अपने खेतों में नई तकनीकों से खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने देसी किस्म शिवानी लौकी को मचान विधि से उगाना शुरू किया और अब उनकी लौकियां 6 फुट तक पहुंच रही हैं।

कश्मीरी और गोल्डन लहसून की खेती भी करते हैं

लौकी के साथ-साथ रवि कश्मीरी लहसून की भी बिजाई करते हैं। इस लहसून की खासियत यह है कि:

इसमें कम कलियां होती हैं

यह 200 से 250 ग्राम तक बढ़ जाता है

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इसके अलावा वे गोल्डन लहसून का उत्पादन भी करते हैं, जिसकी मार्केट में कीमत 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक होती है।

रवि की आधुनिक खेती का यह मॉडल अब इलाके के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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