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Cardamom cultivation: इलायची की खेती सरकारी सब्सिडी के साथ: हर महीने कमाएं लाखों रुपये

On: July 28, 2025 3:16 PM
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Cardamom cultivation: इलायची की खेती सरकारी सब्सिडी के साथ: हर महीने कमाएं लाखों रुपये
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Cardamom cultivation: Cardamom cultivation with government subsidy: Earn lakhs of rupees every month: (Focus Keyword शुरू में उपयोग) इलायची की खेती सरकारी सब्सिडी (cardamom cultivation) के साथ अब किसानों के लिए एक स्थायी आमदनी का स्रोत बन सकती है। इसका उपयोग खाने-पीने से लेकर दवाओं तक में होता है और बाज़ार में लगातार इसकी मांग बनी रहती है।

एक बार लगाए गए पौधे 10 से 15 साल तक उपज देते हैं। इसके लिए उपयुक्त जलवायु है उष्णकटिबंधीय क्षेत्र, जहां तापमान 10°C से 35°C और बारिश 1500-4000 मिमी होती है। (tropical farming crops)

इस फसल को छाया पसंद होती है, इसलिए खेत में करीब 50-60% छाया होना चाहिए। रोपण के लिए मानसून (जुलाई) सबसे उत्तम समय होता है। (cardamom plant spacing) के लिए 2.5×2 मीटर या 2×1.5 मीटर की दूरी उचित मानी जाती है।

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सिंचाई, खाद और देखभाल से उत्पादन बढ़ाएं Cardamom cultivation

इलायची के लिए नियमित सिंचाई जरूरी है। गर्मियों में हर 15 दिन पर पानी देना चाहिए, जबकि मानसून के दौरान आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करें। ड्रिप तकनीक (drip irrigation cardamom) से पानी की बचत होती है और नमी अच्छी बनी रहती है।

उर्वरता बढ़ाने के लिए गोबर की खाद और मिट्टी जांच के बाद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे उर्वरक (fertilisers for cardamom) मिलाएं। 2-3 साल बाद पौधे फल देना शुरू करते हैं। कटाई के बाद फली को धूप या ड्रायर में सुखाया जाता है और छांट कर बिक्री के लिए तैयार किया जाता है।

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कम लागत में अधिक लाभ और सरकारी मदद

एक हेक्टेयर में करीब 400 से 800 किलो इलायची का उत्पादन होता है। यदि बाजार भाव ₹1500 प्रति किलो है तो ₹6-12 लाख की आमदनी हो सकती है। लागत घटाकर भी ₹3-5 लाख का शुद्ध मुनाफा संभव है। (cardamom income)

सरकार किसानों को बागवानी मिशन (NHM) के तहत पौधारोपण, सिंचाई और भंडारण के लिए सब्सिडी देती है। स्पाइस बोर्ड (spice board cardamom) तकनीकी मदद के साथ वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है। किसान स्थानीय बागवानी विभाग या मसाला बोर्ड कार्यालय में संपर्क कर ज्यादा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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