Chhachhrauli Flood छछरौली (यमुनानगर) : तेज बरसात ने सोम नदी, बोली बरसाती नदी को एक बार फिर उफान पर ला दिया। सोम नदी में 23 हजार 100 क्यूसेक का बहाव रहा प्रशासन द्वारा पहले से की गई तैयारियों के बावजूद नदी ने कई जगह किनारे तोड़ दिए और खेतों में पानी ने तबाही मचा दी। इस आपदा में करीब 30 गांव प्रभावित हुए हैं और हजारों एकड़धान पोपलर की फसल जलमग्न हो गई है।
सबसे ज्यादा नुकसान रुकाली में सोम नदी का सबसे बड़ा प्रकोप रूकाली गांव में देखने को मिला। जहां सैकड़ों एकड़ भूमि नदी में समा गई। खड़ी फसल और खेत दोनों बर्बाद हो गए। किसानों का कहना है कि उन्होंने धान और पापलर की खेती में लाखों रुपये की लागत लगाई थी, लेकिन सारी मेहनत पानी में बह गई। किसानों रूकाली गांव में सोम नदी से किसानों की जमीन में होता कटाव सोम नदी किसानों की सारी मेहनत बहा ले गई। किसानों की सारी फसलें बर्बाद हो गई।
कोई बेटी की शादी की तैयारी कर रहा था तो कोई नया मकान बनवाने या बच्चों की फीस भरने का सोच रहा था। नदी में आया उफान सभी की उम्मीदें को बहा ले गया। ये हैं प्रभावित गांव चिंतपुर, खानवाला, रूकाली, गनौला, गनौली, लेदी, तिहानो, हडोली, रायपुर, तारुवाला, बलौली, डमोली, बरोली, माजरा, दशोरा, दसोरी और याकूबपुर सहित 30 से अधिक गांव इस बार बाढ़ की चपेट में आए। खेतों में खड़ी धान और पापलर की फसल पूरी तरह जलमग्न है।
प्रशासन की सफाई और मुआवजा योजना
भाकियू के जिला प्रधान सुभाष गुर्जर ने कहा कि प्रभावित किसानों को सरकार 60 हजार प्रति एकड़ का मुआवजा दे। समय पर गिरदावरी और मुआवजा नहीं मिला तो किसानों का जीवन कई साल पीछे चला जाएगा। पहले से ही महंगे डीजल, खाद और मजदूरी की मार झेल रहे किसान अब आर्थिक संकट की गहरी खाई में धंसने लगे हैं।
37 गांव को किया चिह्नित
एसडीएम छछरौली रोहित कुमार ने बताया कि इस बार बरसात सामान्य से कई गुना अधिक हुई है। किसानों के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल खोल दिया गया है। प्रभावित किसान आनलाइन पंजीकरण कर अपनी क्षति का ब्योरा दर्ज कर मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं। छछरौली उपमंडल के करीब 37 गांवों को प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है।
प्रशासन ने नहीं किया समस्या का समाधान
साहिल राठी ने बताया कि उनकी सात एकड़ जमीन पर खड़े पापलर जलसैलाब की भेंट चढ़ गए। नौ एकड़ भूमि में पांच-पांच फीट तक रेत और गाद भर गई है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासन को स्थिति से अवगत कराया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
सब चौपट कर दिया पानी ने
राजीव कुमार का कहना है कि उनकी 20 से 25 एकड़ धान की फसल मिट्टी में दब गई। इस बार नया ट्रैक्टर लेने का सपना था, पर सब चौपट हो गया। अब तो लागत भी निकालना मुश्किल है।
किसान रोहित कुमार ने कहा कि खेतों रेत गाद व भरने से गन्ने की फसल सबसे ज्यादा खराब हुई है। धान पर 15 से 20 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च किया था, जो मिट्टी में मिल गया।
लविश कुमार बेहद भावुक होकर बोले कि खेतों के हालात देखकर मन उदास हो जाता है। इस बार फसल बेचकर मकान बनाने की सोच रहे थे, लेकिन सब कुछ खत्म हो गया। किसानों की सारी मेहनत पर पानी फिर गया
रेत में दबी महीनों की मेहनत, घर हुआ सूना
तेज वर्षा से सोम और हरिपुर खोल नदी उफान पर आ गई। रात तीन बजे सोम नदी में 23 हजार क्यूसेक से अधिक पानी का बहाव दर्ज किया गया, जबकि हरिपुर खोल नदी का पानी पुल के किनारों को छूता हुआ निकला। लोहगढ़ नदी भी उफान पर रही। इसके चलते गांव धनौरा, बसातियांवाला, रूकाली, खूनवाला और चिंतपुर समेत करीब 30 गांवों में धान, गन्ना और चारे की फसल डूब गई।
खेतों में दो से तीन फीट तक रेत भर गई है। गांव धनौरा के पास नदी पर बना ढाई दशक पुराना पुल भी दबाव में रहा। बसातियांवाला में ही तीन सौ एकड़ से अधिक फसल चौपट हो गई। किसानों ने कहा कि 17 अगस्त की बारिश से हुए नुकसान की भरपाई भी नहीं हो पाई थी कि देवारा आपदा ने खेतों को डुबो दिया। कई जगह खेतों में तीन से चार फीट पानी भर गया है।
मलिकपुर बांगर, धनौरा और आसपास के गांवों के किसानों का कहना है कि चारे की फसल भी खराब होने की कगार पर है। हरिपुर खोल नदी का पानी गांव धनौरा के किसानों हरपाल, हिसम, जसबीर, सतपाल, राहुल, मदन लाल, रोशन लाल और सोनू के खेतों में घुस आया धान, गन्ना और पोपलर की फसल बर्बाद हो गई है।












