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जनवरी की कड़ाके की ठंड से परेशान न हों, यह मौसम आम और लीची के शौकीनों के लिए लाया है बड़ी खुशखबरी

On: January 23, 2026 10:59 AM
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जनवरी की कड़ाके की ठंड से परेशान न हों, यह मौसम आम और लीची के शौकीनों के लिए लाया है बड़ी खुशखबरी
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नई दिल्ली. उत्तर भारत में पड़ रही कड़ाके की ठंड आम और लीची की बंपर पैदावार का संकेत है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मौसम पेड़ों में फूल बनने की प्रक्रिया को तेज करता है।

उत्तर भारत और बिहार में पड़ रही कड़ाके की ठंड भले ही आम लोगों को सता रही हो लेकिन यह मौसम किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जनवरी का यह ठंडा तापमान गर्मियों में आने वाले फलों की मिठास और पैदावार दोनों बढ़ा देगा। दरअसल आम और लीची के पेड़ों के लिए यह समय एक टर्निंग पॉइंट की तरह काम करता है जो बंपर पैदावार की नींव रखता है।

पेड़ों के लिए क्यों जरूरी है यह सर्दी

डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के प्लांट पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ एस के सिंह ने इस मौसम को फलों के लिए बेहद अनुकूल बताया है। उनके मुताबिक जब वातावरण का तापमान 8 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है तो पेड़ों के भीतर एक खास जैविक प्रक्रिया शुरू होती है। इसे विज्ञान की भाषा में फ्लोरल इंडक्शन कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो ठंड के कारण पेड़ अपनी पत्तियों की ग्रोथ रोक देते हैं और सारी ऊर्जा फूल बनाने में लगा देते हैं।

आम के बौर के लिए कुदरती टॉनिक

आम के पेड़ों में अक्सर यह समस्या आती है कि उनमें मंजर की जगह नई पत्तियां निकलने लगती हैं जिससे फल कम आते हैं। जनवरी की यह सर्द हवाएं पेड़ों की वनस्पति वृद्धि यानी पत्तियों के बढ़ने पर नेचुरल ब्रेक लगाती हैं।

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आम की फसल को ऐसे मिलता है फायदा:

  • ठंड की वजह से पेड़ सुप्तावस्था में चले जाते हैं और अपनी ऊर्जा बचाकर रखते हैं।

  • जैसे ही फरवरी में तापमान बढ़ना शुरू होता है यही जमा ऊर्जा मंजर यानी बौर के रूप में बाहर आती है।

  • अगर जनवरी में ठंड न पड़े तो मंजर कमजोर रह जाते हैं और उनके झड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

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लीची की मिठास का सीक्रेट कनेक्शन

शाही लीची की दुनिया दीवानी है लेकिन इसकी पैदावार के लिए चिलिंग पीरियड बहुत महत्वपूर्ण होता है। चिलिंग पीरियड का मतलब है कि लीची के पेड़ों को फूल देने के लिए एक निश्चित समय तक ठंडे तापमान में रहना जरूरी है। बिना इस ठंडक के लीची में फूलों का सही विकास संभव नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार कोहरा भी इस प्रक्रिया में मददगार साबित होता है। हल्का कोहरा वातावरण में नमी बनाए रखता है जिससे फूलों की कोमल कलियां सूखती नहीं हैं। यह नमी पौधों के अंदर पानी की कमी नहीं होने देती और फल लगने की प्रक्रिया को मजबूत करती है।

फरवरी की धूप दिखाएगी असली जादू

सिर्फ ठंड ही काफी नहीं है बल्कि इसके बाद आने वाली धूप भी उतनी ही अहम है। जनवरी में ठंड से गुजरने के बाद जब फरवरी में मौसम खुलेगा और धूप निकलेगी तब थर्मल ट्रांजिशन होगा। यह बदलाव फूलों को फलों में बदलने के लिए ऊर्जा देगा।

किसानों के लिए सलाह है कि वे मौसम के इस बदलाव पर नजर रखें। जैसे ही ठंड कम हो और धूप निकलने लगे तब बागों में हल्की सिंचाई और पोषक तत्वों का प्रबंधन करें। कुदरत का यह चक्र इस बार किसानों की झोली भरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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