Cotton Boll Rot (हरियाणा): बारिश के बाद मौसम साफ तो हो रहा है, लेकिन रात की ठंड नरमा की फसल को तगड़ा झटका दे रही है। अतिवृष्टि की वजह से टिंडे सड़ना बड़ी समस्या बन गया है। ऊपर से पत्ते झुलसना, पौधे जलना और फल-फूल बंद हो जाना किसानों की मुश्किलें आसमान छू रही हैं।
किसानों की फसल पर भारी पड़ी बारिश, 50% तक नुकसान
किसान भाई बताते हैं कि इस बार नरमा की फसल जबरदस्त लग रही थी, लेकिन ज्यादा बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। रुक-रुककर हुई बारिश ने तो जैसे आग में घी डाल दिया। फंगस, उखेड़ा और झुलस रोग से बचने के लिए वो एनपीके के साथ मैग्नीशियम और पोटाश का घोल बनाकर छिड़काव कर रहे हैं। उनका कहना है कि फसल का 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हो चुका है। जहां खेतों में पानी भरा पड़ा है, वहां तो हालत और भी खराब है नुकसान 70-80% तक पहुंच गया।
Cotton Boll Rot: हकृवि की एडवाइजरी
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कॉटन सेक्शन इंचार्ज डॉ. कर्मल सिंह ने किसानों के लिए खास एडवाइजरी जारी की है। टिंडा गलन रोकने के लिए 6 से 8 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन और 600 से 800 ग्राम कोपर ऑक्सिक्लोराइड को 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। ये काम दो से तीन सप्ताह के अंतराल पर दोहराएं।
24-48 घंटे में ये स्प्रे लगाएं
पैराविल्ट रोग से निपटने के लिए 2 ग्राम कोबाल्ट क्लोराइड को 200 लीटर पानी में घोल बनाएं। खेत में 24 से 48 घंटे के अंदर छिड़काव कर दें। डॉ. सिंह कहते हैं कि पौधे झुलसने से पहले ही ये तरीका कारगर साबित होगा।
गुलाबी सुंडी और सफेद मक्खी का खतरा
गुलाबी सुंडी के प्रकोप पर नजर रखने के लिए प्रति एकड़ 2 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। अगर 3 दिनों में 24 से ज्यादा पतंगे पकड़े जाएं, तो तुरंत कीटनाशक का छिड़काव करें। वहीं, सफेद मक्खी का हमला ज्यादा हो तो 200 मिलीलीटर पायरिप्रोक्सिफोन 10 ईसी या 240 मिलीलीटर स्पिरोमेसिफेन ओबरोन 22.9 एससी को 200 से 250 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ 10 से 12 दिन के अंतराल पर स्प्रे करें। इन टिप्स से किसान भाई अपनी मेहनत की फसल को बचा सकते हैं।













