हरियाणा में कृषि कर्ज का मुद्दा एक बार फिर विधानसभा में चर्चा के केंद्र में आ गया है. राज्य सरकार ने बताया है कि 25.67 लाख किसानों पर कुल 60816 करोड़ रुपये का कृषि ऋण बकाया है. सरकार के अनुसार कुछ जिलों में कर्ज का दबाव अपेक्षाकृत ज्यादा है, जबकि कर्ज से राहत के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना की अवधि बढ़ाकर मार्च 2026 कर दी गई है.
यह जानकारी विधानसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखित जवाब के माध्यम से दी. सवाल इंडियन नेशनल लोकदल के विधायक अर्जुन चौटाला ने उठाया था.
विधानसभा में क्या जानकारी दी गई
सरकार से पूछा गया था कि जुलाई 2025 तक राज्य में कितने किसानों पर कितना कृषि ऋण बकाया है और छोटे व सीमांत किसानों के लिए राहत की क्या व्यवस्था है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि 30 सितंबर 2025 तक हरियाणा में 2567467 किसानों पर 60816 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज दर्ज किया गया है. यह कर्ज सहकारी बैंकों और अन्य संस्थानों से लिया गया है.
किन जिलों में कर्ज का बोझ ज्यादा
जिला स्तर पर आंकड़े बताते हैं कि पश्चिमी और मध्य हरियाणा के कुछ जिलों में कृषि कर्ज का दबाव सबसे अधिक है.
• सिरसा में 6360 करोड़ रुपये
• हिसार में 5934 करोड़ रुपये
• करनाल में 4673 करोड़ रुपये
• जींद में 4073 करोड़ रुपये
• कैथल में 4003 करोड़ रुपये
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में नकदी फसलों की लागत अधिक होने और मौसम जोखिम के कारण कर्ज का स्तर ऊंचा है.
1.50 लाख रुपये तक का फसल ऋण बिना ब्याज
सरकार ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि सहकारी बैंक किसानों को उनकी भूमि जोत के आधार पर 1.50 लाख रुपये तक का फसल ऋण उपलब्ध कराते हैं.
यदि किसान समय पर कर्ज चुका देते हैं, तो यह ऋण प्रभावी रूप से शून्य प्रतिशत ब्याज पर पड़ता है.
• केंद्र सरकार 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देती है
• राज्य सरकार 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देती है
सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से छोटे किसानों को सस्ता और समय पर कृषि ऋण मिल रहा है.
OTS योजना से किसानों को कैसे राहत मिलती है
कर्ज न चुका पाने वाले किसानों के लिए हरियाणा सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की है. इसका उद्देश्य ब्याज और पेनाल्टी के बोझ को कम करना है.
पिछली OTS योजनाओं का असर
• वर्ष 2019 की योजना से 308302 किसानों को लाभ
• कुल 1348.40 करोड़ रुपये की राहत
• वर्ष 2022 की योजना में 17847 किसानों को 66.01 करोड़ रुपये की राहत
इन योजनाओं के तहत ब्याज और दंडात्मक ब्याज माफ किया गया.
OTS योजना 2026 तक बढ़ाने का मतलब
सरकार ने अब OTS योजना की अवधि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है. इससे उन किसानों को एक और मौका मिलेगा, जो किसी कारणवश पहले योजना का लाभ नहीं ले पाए.
नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके साथ आय बढ़ाने और लागत घटाने पर भी ध्यान देना जरूरी है.
यह मुद्दा क्यों है महत्वपूर्ण
हरियाणा की अर्थव्यवस्था में कृषि की बड़ी भूमिका है. जब बड़ी संख्या में किसान कर्ज के दबाव में होते हैं, तो इसका असर उत्पादन, निवेश और ग्रामीण मांग पर पड़ता है.
OTS जैसी योजनाएं तात्कालिक राहत देती हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि दीर्घकालिक समाधान के लिए फसल विविधीकरण, सिंचाई सुधार और बाजार तक बेहतर पहुंच जरूरी है.












