Fertilizer Shortage: Farmers in trouble due to shortage of fertilizers: NHRC sends notice to the Center and states!: दिल्ली: देशभर में खाद की कमी से परेशान किसानों की पुकार अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गई है। आयोग ने इसे किसानों के मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए सख्त रुख अपनाया है।
प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। शिकायत में कहा गया है कि कई राज्यों में खाद की भारी किल्लत है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों की फसलें खतरे में हैं। गरीब किसान, जो पहले ही तंगहाली में काम कर रहे हैं, अब खाद के लिए घंटों लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हैं। कई जगहों पर तो पुलिस और प्रशासन ने किसानों पर लाठीचार्ज तक किया, जिससे उनकी तकलीफ और बढ़ गई है।
NHRC ने क्या कहा? Fertilizer Shortage
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग ने खाद की कमी को किसानों के अधिकारों का उल्लंघन बताया और सभी जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया गया है कि वे अपने जिला अधिकारियों को खाद का समय पर और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के लिए कहें। साथ ही, खाद की कमी से जुड़ी शिकायतों की तुरंत जांच करने को कहा गया है।
पुलिस को सख्त हिदायत
आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों को साफ निर्देश दिए हैं कि खाद के लिए कतारों में खड़े किसानों पर किसी भी तरह का बल प्रयोग, लाठीचार्ज या अपमानजनक व्यव,posh behavior न किया जाए। अगर ऐसी कोई घटना हुई है, तो उसकी पूरी रिपोर्ट आयोग को भेजने को कहा गया है।
मंत्रालयों को निर्देश
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को खाद के प्रबंधन और वितरण को बेहतर करने के लिए कहा गया है। मंत्रालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों को बिना किसी परेशानी के खाद उपलब्ध कराएं और इस मामले में दो हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपें।
दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
NHRC ने सभी संबंधित अधिकारियों से दो हफ्ते के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) जमा करने को कहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर आयोग खाद वितरण की प्रक्रिया को और आसान बनाने की दिशा में काम करेगा। आयोग का मकसद है कि किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक समय पर खाद मिले और उनकी परेशानियां कम हों।













