Ghaggar Drain Flood (हिसार) : जिले के बीच से होकर गुजरने वाली घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन अत्यधिक बरसात के कारण ओवरफ्लो चल रही है। इसमें कैपेसिटी से 300 क्यूसिक से ज्यादा पानी चल रहा है। ड्रेन की कैपेसिटी करीब 500 क्यूसिक पानी की है जबकि अभी इसमें 800 क्यूसिक से ज्यादा पानी चल रहा है। इसके कारण ड्रेन जगह जगह टूट रही है। बीती रात भी लाडवा और गंगवा के पास ड्रेन टूट गई। जिसके कारण करीब 800 एकड़ एरिया में पानी फैल गया, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे पहले पातन, शाहपुर और मात्रश्याम गांवों में भी ड्रेन टूट चुकी है।
लाडवा और गंगवा में ड्रेन टूटी
लाडवा और भोजराज दोनों ही तरफ ड्रेन बीती रात को टूटने से खेतों में पानी खड़ा हो गया । सुबह से ही मनरेगा मजदूरों और ग्रामीणों की सहायता से ड्रेन को पाटने का काम शुरू हुआ। बीती रात करीब तीन बजे गंगवा के पास भी ड्रेन टूट गई, यहां करीब 25 फुट चौड़ी दरार आई, जिसके कारण करीब 400 से 500 एकड़ एरिया प्रभावित है।
यहां करीब 15 ढाणियों में भी तीन से चार फुट तक पानी चला गया। ड्रेन के नजदीक लगने वाली ढाणियों में रहने वाले लोगों को अपने पशु व सामान लेकर पलायन करना पड़ा है। ड्रेन को पाटने का काम शुरू हुआ तो यह दूसरी जगह से भी टूट गई। इसके कारण शाम छह बजे तक जाकर ड्रेन को पाटने का काम हो पाया।
बरसात से फसलें हुई प्रभावित
इधर उकलाना एरिया में भी ज्यादा बरसात के कारण फसलें प्रभावित हुई हैं। जिला पार्षद कर्मकेश कुंडू ने बताया कि कपास, बाजरा, मूंग, ग्वार व अन्य फसलें जलभराव और मौसम की मार से नष्ट हो रही हैं। इस बीच सरकार द्वारा चालू किया गया क्षति पूर्ति पोर्टल कई दिनों से काम नहीं कर रहा। बरसात के गंगवा, कैमरी गांव में टूटी ड्रेन इसी दौरान मनरेगा मजदूर मिट्टी के कट्टे लगाकर बंद को रोकते हुए चलते जलभराव होने से फसलों और आसपास का इलाका भरा पानी।
ढाणियों से लोगों ने शुरू किया पलायन
गंगवा से जिला पार्षद प्रतिनिधि मनोज टाक ने बताया कि ड्रेन टूटने से गांव की करीब 400 से 500 एकड़ एरिया में फसलें प्रभावित हैं, करीब 15 ढाणियों में पानी घुसा है, लोग पलायन करने पर मजबूर हैं। इससे पहले भी नजदीकी गांवों में ड्रेन टूटी है। सरकार को तुरंत किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए।
अभी 5 सितंबर तक बरसात की संभावना
मानसून टर्फ पश्चिमी विक्षोभ की वजह से पंजाब पर बने चक्रवातीय सर्कुलेशन से हरियाणा – दिल्ली पर पहुंचने से 1 से 5 सितंबर के दौरान मानसून में सक्रियता देखने को मिलेगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान समय में बंगाल की खाड़ी पर बना निम्न दाब क्षेत्र, छत्तीसगढ़ के मध्य भागों और निकटवर्ती क्षेत्रो पर अवस्थित है।
जो धीरे-धीरे उत्तर पश्चिमी मैदानी इलाकों की तरफ पहुंचने से और पश्चिमी विक्षोभ के असर से सम्पूर्ण पर्वतीय इलाकों और उत्तरी मैदानी राज्यों विशेषकर हरियाणा- दिल्ली में मानसून की झमाझम बारिश की गतिविधियों की संभावना बन रही है। हिसार का अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री रहा, जो सामान्य से 1 डिग्री सेल्सियस कम है।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन आनंद श्योराण ने बताया कि घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन में कैपेसिटी से ज्यादा पानी आ रहा है। लाडवा और गंगवा के पास नहर पट का काम सुबह ही शुरू कर दिया था। दोनों जगहों पर ड्रेन पाट दी गई है, अभी स्थिति कंट्रोल में है।












