चंडीगढ़ . हरियाणा सरकार ने रबी सीजन 2026 की फसल खरीद के लिए कड़े और नए नियम लागू कर दिए हैं। 1 अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूं की खरीद में अब किसानों को बायोमेट्रिक हाजिरी देनी होगी और वाहनों पर नंबर प्लेट होना अनिवार्य होगा।
इस बार अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल और सिरसा समेत प्रदेश की सभी अनाज मंडियों में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया है। अब मंडी के गेट पर पहुंचते ही किसान को अपनी पहचान बायोमेट्रिक मशीन के जरिए पुख्ता करनी होगी।
वाहनों के लिए कड़े नियम और ई-गेट पास
मंडियों में एंट्री पाने के लिए अब केवल ट्रैक्टर-ट्रॉली ले जाना ही काफी नहीं होगा। नए नियमों के तहत फसल लाने वाले हर वाहन पर नंबर प्लेट होना अनिवार्य कर दिया गया है। मंडी के गेट पर तैनात कर्मचारी वाहन की फोटो भी खींचेंगे। इसके साथ ही, ई-गेट पास की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जा रहा है। किसान सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे के बीच ही अपना ऑनलाइन गेट पास बनवा सकेंगे, जिसके बिना अनाज मंडी के अंदर प्रवेश वर्जित रहेगा।
डिजिटल खरीद से पारदर्शी होगा भुगतान
सरकार ने इस बार फसल की एंट्री से लेकर बोली और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल मोड पर शिफ्ट कर दिया है। इस डिजिटल खरीद प्रणाली का सीधा फायदा आम किसान को मिलेगा क्योंकि इससे कागजी कार्रवाई की झंझट खत्म होगी और बिचौलियों का दखल कम होगा। इसका मुख्य मकसद फर्जीवाड़े को रोकना और किसानों के बैंक खातों में फसल का पैसा सीधे और समय पर पहुंचाना है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह नया सिस्टम मंडियों को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए तैयार किया गया है।
मेरी फसल-मेरा ब्यौरा: क्यों है यह हर किसान के लिए जरूरी?
हरियाणा के किसानों के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल एक ऐसा सेतु है, जो उन्हें सीधा मंडियों और सरकारी योजनाओं से जोड़ता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रबी सीजन 2026 में गेहूं, सरसों और अन्य फसलों की खरीद के लिए पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के न तो मंडी का गेट पास कटेगा और न ही किसान को फसल का उचित दाम मिल पाएगा। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और किसान की मेहनत की कमाई को सीधे उनके हाथों में पहुंचाना है।
बैंक खाता और पेमेंट का नया सिस्टम
भुगतान प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए इस साल बैंक खाते का आधार से लिंक होना अनिवार्य कर दिया गया है। पोर्टल पर पंजीकरण के समय किसान को अपने बैंक का नाम, आईएफएससी (IFSC) कोड और खाता संख्या दोबारा जांच लेनी चाहिए। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि यदि बैंक विवरण में छोटी सी भी गलती हुई, तो पेमेंट अटक सकता है। पंजीकरण पूरा होने के बाद, किसान को एक रसीद मिलती है, जिसे सुरक्षित रखना चाहिए क्योंकि यही रसीद मंडी में फसल ले जाते समय काम आएगी।
पंजीकरण की नई और सुरक्षित प्रक्रिया
2026 के नए अपडेट्स के अनुसार, अब पोर्टल पर लॉग-इन करने के लिए परिवार पहचान पत्र (PPP) यानी फैमिली आईडी का होना जरूरी है। किसान को सबसे पहले अपनी फैमिली आईडी दर्ज करनी होगी, जिसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा। सत्यापन के बाद, किसान को अपनी भूमि का विवरण जैसे जिला, तहसील, गांव और खसरा नंबर चुनना होगा। इस बार पटवारी और गिरदावरी के डेटा को पहले से ही सिंक किया गया है, जिससे गलत जानकारी भरने की गुंजाइश कम हो गई है।
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