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Haryana Rain Damage Crops: लगातार बारिश से खेतों में तबाही, किसान फिर संकट में

On: जुलाई 22, 2025 11:08 पूर्वाह्न
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Haryana Rain Damage Crops: लगातार बारिश से खेतों में तबाही, किसान फिर संकट में
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Haryana Rain Damage Crops: Continuous rains cause destruction in fields, farmers in trouble again: Haryana Rain Damage Crops की वजह से राज्य के अनेक जिलों में खेत जलमग्न हो गए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 21 जुलाई की रात से (IMD rainfall alert) के तहत मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ी है।

पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल में (Haryana Yellow Alert) जारी किया गया है। सिर्फ सोमवार को ही इन जिलों में औसतन 6 से 21 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे हजारों एकड़ जमीन पर पानी भर गया।

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लगातार हो रही तेज बारिश से (waterlogged fields Haryana) में फसलें डूब गई हैं। झज्जर में 12 हजार एकड़, रोहतक में करीब 19 हजार, हिसार में 7 हजार और फतेहाबाद में 1800 एकड़ फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

यमुनानगर के पांच गांवों में 500 एकड़ से अधिक धान की फसल दोबारा रोपनी करनी पड़ी। वहीं सिरसा में नरमा, ग्वार और मूंगफली की फसलें तबाह हो गईं, जिससे किसानों ने मजबूरी में ट्रैक्टर चला दिए।

कई इलाकों में पंपसेट लगाकर पानी निकाला जा रहा है। कुरुक्षेत्र, भिवानी और इंद्री क्षेत्र में स्थिति और खराब है, जहां किसानों को जान जोखिम में डालकर (farmers struggling Haryana) काम करना पड़ रहा है।

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मौसम की मार से तापमान गिरा, पर उमस ने सताया

बारिश के चलते तापमान में गिरावट जरूर आई लेकिन पानीपत, जींद और करनाल जैसे क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी के बाद (rain humidity rise) के कारण उमस में वृद्धि हो गई।

अंबाला और यमुनानगर में तो सड़कों पर भी जलभराव हो गया, जिससे ट्रैफिक जाम और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस समय राज्य भर में किसानों की हालत सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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