जैविक खेती को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य के साथ सरकार ने गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना शुरू की है। इस योजना के तहत किसान और पशुपालक वर्मी कम्पोस्ट यूनिट बनवाने पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों को महंगे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिल पाएगा।
जैविक खेती पर जोर क्यों
पिछले कुछ वर्षों में खेती में रासायनिक खादों का उपयोग बढ़ा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता पर असर पड़ा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक खाद में मौजूद सूक्ष्म तत्व मिट्टी को दीर्घकालिक पोषण देते हैं और फसलों की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।
कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुसार,
“यह योजना सिर्फ जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नहीं बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को बचाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। किसानों को इससे लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिलेगा।”
वर्मी कम्पोस्ट यूनिट से कैसे बदलेंगे हालात
एक बार वर्मी कम्पोस्ट यूनिट तैयार हो जाने पर किसान कई वर्षों तक प्राकृतिक खाद तैयार कर सकते हैं। इसकी लागत बेहद कम होती है और यह खेत की मिट्टी को निरंतर पोषण देता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि
“वर्मी कम्पोस्ट से मिट्टी की संरचना सुधरती है, पानी की क्षमता बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार आता है।”
योजना में कितनी मिल रही सब्सिडी
सरकार चाहती है कि देश का हर किसान जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाए।
वर्मी कम्पोस्ट यूनिट अपनाने वाले किसानों को 10,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब किसान के पास खेती योग्य भूमि हो।
कौन ले सकता है योजना का लाभ और कैसे करें आवेदन
इस योजना का फायदा उन किसानों को दिया जाएगा जिनके पास कम से कम तीन गोवंश हैं। इससे न सिर्फ जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा बल्कि गोवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
किसान किसान साथी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के लिए ये दस्तावेज आवश्यक हैं:
पहचान प्रमाण
ई साइन
जमाबंदी कागजात
क्यों जरूरी है वर्मी कम्पोस्ट
खेती की लागत कम करती है
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है
जैविक खाद से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर होता है
बाजार में महंगी जैविक खाद खरीदने से बचत होती है
मिट्टी में पोषक तत्व लंबे समय तक बने रहते हैं
किसानों के लिए यह बदलाव खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













