ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Organic Fertilizer: घर पर बनाएं जीवामृत: प्राकृतिक खेती से बढ़ाएं मुनाफा, मिट्टी को दें नया जीवन

On: June 12, 2025 8:46 AM
Follow Us:
Organic Fertilizer: घर पर बनाएं जीवामृत: प्राकृतिक खेती से बढ़ाएं मुनाफा, मिट्टी को दें नया जीवन
Join WhatsApp Group

Organic Fertilizer: Make Jeevamrit at home: Increase profits through natural farming, give new life to the soil: आज के समय में जब लोग रासायनिक खादों और कीटनाशकों से दूर स्वस्थ और शुद्ध भोजन की ओर रुख कर रहे हैं, प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर बनकर उभर रही है।

यदि आप भी कम लागत में बेहतर पैदावार और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना चाहते हैं, तो जीवामृत खाद आपके लिए वरदान साबित हो सकती है। यह पूरी तरह प्राकृतिक खाद है, जिसे देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। आइए, जानते हैं कि कैसे जीवामृत खेती को नई दिशा दे सकता है और इसके क्या फायदे हैं।Organic Fertilizer

प्राकृतिक खेती का मतलब है रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों को अलविदा कहकर देसी तरीकों से खेती करना। इसमें गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है, जो फसलों को पोषण देने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत को भी बेहतर बनाते हैं।

मल्टी वैरायटी मैंगो फार्मिंग : एक ही पेड़ पर उगेंगे दशहरी, लंगड़ा और चौसा, किसानों के लिए कमाल की है यह तकनीक
मल्टी वैरायटी मैंगो फार्मिंग : एक ही पेड़ पर उगेंगे दशहरी, लंगड़ा और चौसा, किसानों के लिए कमाल की है यह तकनीक

जीवामृत खाद इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो मिट्टी में सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करता है और फसलों को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह खाद न केवल फसल की गुणवत्ता बढ़ाती है, बल्कि लागत को भी कम करती है।

जीवामृत तैयार करना बेहद आसान है। इसके लिए 200 लीटर पानी में 5 किलो देसी गाय का ताजा गोबर, 5 लीटर गोमूत्र, 1 किलो गुड़ और 1 किलो बेसन मिलाएं।

इस मिश्रण को लकड़ी की छड़ी से अच्छी तरह हिलाकर किसी छायादार जगह पर 48 घंटे के लिए ढंककर रख दें। हर 12 घंटे में इसे हिलाना न भूलें। 48 घंटे बाद यह खाद तैयार हो जाती है, जिसे 1:5 के अनुपात में पानी के साथ मिलाकर खेतों में छिड़काव या टपका सिंचाई के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, जीवामृत से तरल हिस्सा निकालने के बाद बचा ठोस पदार्थ, जिसे घनजीवामृत कहते हैं, बुवाई से पहले मिट्टी में मिलाने से उर्वरता में और इजाफा होता है।

यूरिया के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं, सरकार ला रही नई डिजिटल सुविधा
यूरिया के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं, सरकार ला रही नई डिजिटल सुविधा

इस प्राकृतिक खाद के फायदे अनगिनत हैं। यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है, फसलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है, और उत्पादन में वृद्धि करता है।

साथ ही, यह लागत को कम करता है और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित फसलें उगाने में मदद करता है। रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव, जैसे कैंसर और किडनी की समस्याएं, से बचने के लिए प्राकृतिक खेती आज की जरूरत है। जीवामृत के उपयोग से न केवल किसानों का मुनाफा बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, खेतों की मिट्टी जांचने के लिए 2.5 करोड़ की लागत से आएंगी आधुनिक किट
हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, खेतों की मिट्टी जांचने के लिए 2.5 करोड़ की लागत से आएंगी आधुनिक किट

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment