Pomegranate Farming Success Story : राजस्थान के जालोर जिले में भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व मुख्य प्रबंधक निहाल सिंह ने सेवानिवृत्ति के बाद अनार की बागवानी में सफलता की नई मिसाल कायम की है। सायला तहसील के बावतरा गांव में 20 एकड़ बंजर भूमि पर 5,000 पौधों का बगीचा तैयार कर वे टपक सिंचाई और जैविक प्रबंधन से बंपर उत्पादन हासिल कर रहे हैं।
Rajasthan anar ki kheti shuru karne ka tarika : राजस्थान के जालोर जिले की सायला तहसील स्थित बावतरा गांव निवासी निहाल सिंह ने कॉर्पोरेट करियर के बाद आधुनिक कृषि में मिसाल पेश की है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में चीफ मैनेजर पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपनी 20 एकड़ जमीन पर अनार की बागवानी को पूर्णकालिक कार्य बनाया। पिछले छह वर्षों के वैज्ञानिक प्रबंधन और जैविक प्रयोगों के दम पर वे अब तक पांच सफल फसलें निकाल चुके हैं और वर्तमान में अपनी छठी फसल की तैयारी में जुटे हैं।
नौकरी से खेत तक
निहाल सिंह का जुड़ाव पहले से खेती से था, लेकिन बैंक की व्यस्त नौकरी के कारण वे समय नहीं दे पाते थे। उस दौर में उनके बेटे खेती की देखरेख का जिम्मा संभालते थे।
सेवानिवृत्ति मिलते ही उन्होंने समय गंवाए बिना अनार की व्यवस्थित बागवानी की बागडोर अपने हाथों में ले ली। उन्होंने रसायन-आधारित पारंपरिक तौर-तरीकों के बजाय जैविक खेती के मॉडल को समझा और उसे धरातल पर लागू किया।
20 एकड़ में 5000 पौधे
निहाल सिंह ने अपने 20 एकड़ के बगीचे में करीब 5,000 अनार (pomegranate farming profit per acre hindi) के पौधे रोपे हैं। इनमें तीन वर्ष, पांच वर्ष और छह वर्ष की आयु वाले अलग-अलग बैच के पौधे मौजूद हैं। उन्होंने शुरुआती दौर में नागपुर से टिशू कल्चर के पौधे मंगवाए थे, जिससे पौधों की शुरुआती बढ़वार मजबूत रही और बीमारियों का खतरा काफी कम हुआ। वे बताते हैं कि अनार में व्यावसायिक उत्पादन आमतौर पर तीसरे वर्ष से शुरू होता है, हालांकि उन्होंने दूसरे वर्ष के बाद ही पहली फसल ले ली थी।
जालोर का मौसम और फसल चक्र
जालोर की कठोर जलवायु में गर्मियों का भारी तापमान और सर्दियों की तेज ठंड अनार की बागवानी के लिए बड़ी चुनौती बनती है। निहाल सिंह ने स्थानीय परिस्थितियों को भांपते हुए अपने बाग का फसल चक्र जून महीने से निर्धारित किया।
जून में मॉनसून के आगमन के साथ पौधों का चक्र शुरू होता है और तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आती है। इसके बाद दिसंबर से फलों की तुड़ाई शुरू होती है, जो अलग-अलग चरणों में लगभग तीन महीने तक निरंतर चलती है।
आराम काल में पोषण
मार्च महीने में तुड़ाई समाप्त होने के बाद अनार के पौधों का रेस्ट पीरियड यानी आराम काल शुरू होता है। निहाल सिंह के मुताबिक, इस दौर में बगीचे को लावारिस छोड़ना पौधों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
इस समय भी पौधों की बुनियादी पोषण जरूरतों को पूरा किया जाता है ताकि जून में नया चक्र शुरू होने पर पौधे पूरी ताकत से फल दे सकें। स्वस्थ पौधे में प्राकृतिक रूप से कीटों और फफूंद से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है।
मिट्टी सुधार और ड्रिप सिंचाई
खेत की मिट्टी में जैविक कार्बन का स्तर 0.25 से 0.30 प्रतिशत के आसपास होना एक गंभीर समस्या थी, जिससे जमीन की जलधारण क्षमता घट रही थी। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने खेत में जैविक पदार्थों और जैविक इनपुट का प्रयोग तेज किया, जिससे मिट्टी में नमी (drip irrigation for pomegranate in rajasthan) और पोषक तत्वों का संतुलन सुधरा।
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जालोर में ट्यूबवेल 900 फीट गहरा है और पानी 700 फीट नीचे मिलता है। पानी की कमी को देखते हुए उन्होंने पूरे बगीचे में ड्रिप इरिगेशन तकनीक लगाई, जिससे पौधे को जरूरत के मुताबिक नमी मिलती है और पानी का बिल्कुल अपव्यय नहीं होता।
कीट नियंत्रण और रोग प्रबंधन
अनार एक तकनीकी और संवेदनशील फसल (organic farming of pomegranate techniques) है, जिसमें इल्ली, थ्रिप्स, ब्लाइट और फ्रूट फ्लाई जैसे कीट भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। फ्रूट फ्लाई फल के भीतर अंडे देकर उसे सड़ा देती है, जबकि फंगल संक्रमण से फल के छिलके पर काले धब्बे पड़ जाते हैं।
निहाल सिंह बगीचे की रोज खुद निगरानी करते हैं और प्राथमिक स्तर पर जैविक कीटनाशकों का ही इस्तेमाल करते हैं। मिट्टी में सीधे रासायनिक खाद डालने के बजाय वे अत्यंत जरूरत पड़ने पर केवल ऊपरी पत्तों पर आवश्यक स्प्रे का छिड़काव करते हैं। #PomegranateFarming #OrganicFarming #RajasthanFarmers













