Sheep Farming: Ship Farming: 900 sheep from Australia in Jammu and Kashmir, farmers’ fortunes will shine!: शिप फार्मिंग (Sheep Farming) जम्मू-कश्मीर में ग्रामीण किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है! ऑस्ट्रेलिया से 900 उन्नत टैक्सल और डार्पर नस्ल की भेड़ें लाई गईं।
यह पहल मांस और ऊन उत्पादन बढ़ाएगी। किसानों की आय में सुधार होगा। समग्र कृषि विकास योजना के तहत यह कदम उठाया गया। स्वास्थ्य जांच के बाद प्रजनन शुरू होगा। कश्मीर और कठुआ में भेड़ें भेजी गईं। इस (Sheep Farming) से ग्रामीण अर्थव्यवस्था चमकेगी। आइए, इस योजना की खासियत जानें!
ऑस्ट्रेलिया से 900 भेड़ें
जम्मू-कश्मीर में शिप फार्मिंग (Sheep Farming) को नई दिशा मिल रही है। ऑस्ट्रेलिया से 900 टैक्सल और डार्पर भेड़ें लाई गईं। कश्मीर में 450 टैक्सल भेड़ें खिंबर फार्म में हैं।
कठुआ में 235 डार्पर भेड़ें पैंथल फार्म में रखी गईं। यह योजना ग्रामीण किसानों की आय बढ़ाएगी। मांस और ऊन का उत्पादन बढ़ेगा। समग्र कृषि विकास योजना का यह हिस्सा है। यह कदम पशुपालन को मजबूत करेगा।
स्वास्थ्य जांच में सख्ती
इन भेड़ों की स्वास्थ्य जांच चल रही है। सैंपल भोपाल, लुधियाना और बरेली की लैब्स में भेजे गए। ब्लू टंग, फुट रॉट, स्क्रैपी जैसी बीमारियों की जांच हो रही है।
यह सुनिश्चित करेगा कि भेड़ें स्वस्थ हैं। प्रजनन तभी शुरू होगा। इस (Sheep Farming) में गुणवत्ता पर जोर है। स्वस्थ भेड़ें बेहतर उत्पादन देंगी। जांच पूरी होने के बाद संतानों को अन्य केंद्रों में बांटा जाएगा।
टैक्सल नस्ल की खासियत
टैक्सल भेड़ें नीदरलैंड के टेक्सेल द्वीप से हैं। यह नस्ल मांस की गुणवत्ता के लिए मशहूर है। इनका चेहरा छोटा और नाक काली होती है। सिर और पैरों पर ऊन नहीं होता।
इससे ऊन की सफाई आसान है। टैक्सल तेजी से वजन बढ़ाती हैं। इस (Sheep Farming) में टैक्सल किसानों के लिए वरदान हैं। कश्मीर के किसान इनसे मांस और ऊन की अच्छी कमाई करेंगे।
डार्पर नस्ल का कमाल
डार्पर भेड़ें दक्षिण अफ्रीका की हैं। इन्हें 1940 में डोरसेट और ब्लैकहेड फारसी भेड़ों से बनाया गया। इनके मेमने 4 महीने में 35-40 किलो के हो जाते हैं।
वयस्क डार्पर 90 किलो तक भारी होती हैं। इनकी प्रजनन क्षमता शानदार है। यह हर जलवायु में ढल जाती हैं। इस (Sheep Farming) में डार्पर मांस उत्पादन बढ़ाएंगी। कठुआ के किसानों को बड़ा फायदा होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल
यह शिप फार्मिंग (Sheep Farming) योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत देगी। कम पूंजी में शुरू होने वाला यह व्यवसाय लाभकारी है। मांस, ऊन और मेमनों की बिक्री से आय बढ़ेगी।
जम्मू-कश्मीर के किसान आत्मनिर्भर बनेंगे। टैक्सल और डार्पर नस्लें उत्पादन को दोगुना करेंगी। यह पहल छोटे किसानों के लिए वरदान है। इस (Sheep Farming) से गाँवों में खुशहाली आएगी। जम्मू-कश्मीर की खेती और पशुपालन चमकेगा!












