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उत्तर भारत में पाले का बढ़ता खतरा, फसलों पर मंडरा रहा नुकसान का संकट

On: December 21, 2025 8:51 AM
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उत्तर भारत में पाले का बढ़ता खतरा, फसलों पर मंडरा रहा नुकसान का संकट
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उत्तर भारत में सर्दी अब केवल ठिठुरन तक सीमित नहीं रही। जैसे जैसे रात का तापमान तेजी से गिर रहा है, खेतों में खड़ी फसलों पर पाले का खतरा बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री के आसपास पहुंच रहा है, जिससे नमी बर्फ की परत में बदलने लगती है। यही स्थिति किसानों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह मानी जाती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पाला कुछ ही घंटों में फसल को भारी क्षति पहुंचा सकता है। हरी भरी फसल सुबह तक मुरझाई और काली दिखाई देने लगती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है।

पाला क्या है और यह फसलों को कैसे नुकसान पहुंचाता है

बर्फ की परत से अंदर तक टूटता पौधा

जब रात में तापमान बहुत नीचे चला जाता है और हवा शांत रहती है, तब हवा में मौजूद नमी सीधे बर्फ के कणों में बदल जाती है। यह बर्फ पौधों की पत्तियों और तनों पर जम जाती है।

कृषि विज्ञानियों का कहना है कि इस दौरान पौधों की कोशिकाओं के अंदर मौजूद पानी जम जाता है। पानी के जमते ही कोशिकाएं फट जाती हैं, जिससे पौधा अंदर से कमजोर हो जाता है। इसका सीधा असर फूलों, पत्तियों और दानों पर पड़ता है।

किन फसलों को सबसे ज्यादा खतरा

सब्जी और तिलहन फसलें सबसे संवेदनशील

पाले का असर सभी फसलों पर समान नहीं होता। कुछ फसलें बेहद संवेदनशील होती हैं और थोड़ी सी ठंड भी उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है।

सबसे अधिक जोखिम वाली फसलें

  • आलू और टमाटर

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  • मटर और सरसों

  • पपीता और अन्य सब्जियां

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ठंड का यह दौर लंबा चला, तो गेहूं और गन्ना जैसी अपेक्षाकृत मजबूत फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पर असर पड़ना तय है।

पाला पड़ने के अनुकूल मौसम की पहचान

किसान कैसे करें समय रहते अंदाजा

कृषि विज्ञान केंद्रों के अनुसार कुछ मौसम संकेत पाले की संभावना को साफ दिखाते हैं।

  • दिन में तेज धूप निकलना

  • शाम के बाद हवा का बिल्कुल शांत हो जाना

  • रात में आसमान साफ रहना

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  • वातावरण में नमी का अधिक होना

इन परिस्थितियों में तापमान तेजी से गिरता है और पाले की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

पाले से फसल को बचाने के पारंपरिक उपाय

धुआं और सिंचाई आज भी कारगर

किसानों के बीच सबसे पुराना और भरोसेमंद तरीका खेत में धुआं करना माना जाता है। खेत की मेड़ों पर घास या फसल अवशेष जलाने से हल्की गर्मी बनी रहती है और ठंडी हवा सीधे फसल तक नहीं पहुंच पाती।

हल्की सिंचाई भी एक प्रभावी उपाय है। गीली मिट्टी तापमान को लंबे समय तक बनाए रखती है, जिससे पाले का प्रभाव कम होता है। सुबह के समय फसल को हल्के से हिलाने पर पत्तियों पर जमी ओस गिर जाती है और बर्फ जमने से बचाव होता है।

वैज्ञानिक तरीकों से कैसे बढ़ाएं फसल की सुरक्षा

स्प्रे और पोषक तत्वों की भूमिका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कुछ रासायनिक और पोषण आधारित उपाय फसलों की सहनशीलता बढ़ाते हैं।

  • घुलनशील सल्फर का हल्का छिड़काव

  • ग्लूकोज या यूरिया का सीमित प्रयोग

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  • पोटाश आधारित पोषक तत्वों का उपयोग

इन उपायों से पौधों की कोशिकाएं मजबूत होती हैं और वे ठंड का बेहतर सामना कर पाती हैं।

लंबे समय का समाधान क्या है

खेत की दिशा और पेड़ों की अहमियत

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खेत की उत्तर पश्चिम दिशा में वायुरोधक पेड़ लगाए जाएं। शीशम, बबूल और आम जैसे पेड़ ठंडी हवाओं की सीधी मार को रोकते हैं। इससे हर साल पाले से होने वाला नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यह जानकारी किसानों के लिए क्यों जरूरी है

पाला अचानक आता है और नुकसान भी तेजी से करता है। समय रहते सतर्कता और सही उपाय अपनाने से फसल को बचाया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि थोड़ी सी तैयारी पूरे सीजन की पैदावार और आमदनी को सुरक्षित रख सकती है। आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना है, इसलिए किसानों के लिए अभी से योजना बनाना बेहद जरूरी है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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