Dhirendra Shastri Hanuman Katha: Hanuman Katha by Dhirendra Shastri 2025: Call to create a Hindu nation in Panipat and save daughters from love jihad: हरियाणा के पानीपत में धीरेंद्र शास्त्री की हनुमान कथा (Dhirendra Shastri Hanuman Katha) का तीन दिवसीय अमृत महोत्सव 15 नवंबर 2025 को भव्य समापन के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत को हिंदू राष्ट्र (Hindu Rashtra) बनाने का जोरदार आह्वान किया।
उन्होंने लव जिहाद (Love Jihad) से बेटियों को बचाने और सनातन धर्म (Sanatan Dharma) को जागृत करने की बात कही। हजारों श्रद्धालुओं (devotees) के बीच शास्त्री ने श्रीराम और हनुमान के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक (spiritual event) बल्कि सामाजिक जागरूकता (social awareness) का भी एक शानदार मंच साबित हुआ। आइए जानते हैं इस कथा की खास बातें और शास्त्री के संदेश की गहराई।
धीरेंद्र शास्त्री की हनुमान कथा: सत्यम-शिवम्-सुंदरम् की शुरुआत Dhirendra Shastri Hanuman Katha
पानीपत के सेक्टर 13-17 में आयोजित इस तीन दिवसीय हनुमान कथा (Hanuman Katha) की शुरुआत पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने सत्यम-शिवम्-सुंदरम् के मंत्र के साथ की। उन्होंने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा, “उस चांद को गुरूर था कि उसके पास नूर है, लेकिन मेरे पास बालाजी जैसा कोहिनूर है।” इसके बाद उन्होंने भजन “मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है” गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
जामवंत और हनुमान के संवाद के माध्यम से उन्होंने श्रीराम के कार्य (Ram’s mission) के लिए हनुमान के जागरण की कहानी सुनाई। शास्त्री ने बताया कि जब जामवंत ने हनुमान को उनके उद्देश्य की याद दिलाई, तब हनुमान ने पूछा, “क्या लंका को लेकर आना है?” इस कहानी से उन्होंने भक्तों को प्रेरणा दी कि जीवन में सही दिशा और उद्देश्य की जरूरत है।
हिंदू राष्ट्र और लव जिहाद पर सख्त संदेश
धीरेंद्र शास्त्री ने कथा के समापन पर हिंदू राष्ट्र (Hindu Rashtra) बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “जाग जाओ, भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है, और हमारी बेटियों को लव जिहाद (Love Jihad) से बचाना है।” उन्होंने सनातनियों (Sanatanis) को जागृत करने के लिए 7 से 15 नवंबर तक तीन राज्यों में यात्रा करने की घोषणा की, जिसमें वे 400 से अधिक गांवों में हिंदू राष्ट्र की अलख जगाएंगे।
शास्त्री ने श्रद्धालुओं से पूछा, “हमें अकेला तो नहीं छोड़ दोगे?” और कहा कि कुछ लोगों की “ठठरी बांधनी” और “दुकानें बंद करानी” हैं, जो देश और धर्म के खिलाफ काम कर रहे हैं। इस संदेश ने श्रद्धालुओं (devotees) में जोश भरा और सामाजिक जागरूकता (social awareness) को बढ़ावा दिया।
श्रीराम के बनकर जीने का संदेश
शास्त्री ने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन दो तरह से जिया जा सकता है—धर्मात्मा बनकर या पापी बनकर। उन्होंने कहा, “बनना है तो श्रीराम के बनो, जग के बनने से दुख मिलेगा, लेकिन जगदीश के बनने से जीवन खुशहाल होगा।” उन्होंने लोगों से वासना को छोड़कर उपासना की ओर बढ़ने और सत्य का मार्ग अपनाने का आग्रह किया।
शास्त्री ने यह भी बताया कि आज का समय उल्टा-पुल्टा हो गया है, जहां लोग अकेले सब कुछ पाना चाहते हैं। उनके इस संदेश ने भक्तों को आत्ममंथन करने और सनातन धर्म (Sanatan Dharma) के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
आयोजन में शामिल हुए गणमान्य व्यक्ति
इस भव्य आयोजन में हरियाणा के कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी भी शामिल हुए और उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री से आशीर्वाद लिया। अखिल भारतीय श्री राम-नाम जागरण मंच और बागेश्वर धाम सेवा मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कथा में साधु-संत और आयोजक मंडल के सदस्य भी मौजूद रहे।
इससे पहले शास्त्री ने पानीपत के डाहर गांव में लोगों को दीक्षा (spiritual initiation) दी, जिसने आयोजन को और खास बना दिया।
सनातन जागरण की यात्रा
धीरेंद्र शास्त्री की हनुमान कथा (Dhirendra Shastri Hanuman Katha) न केवल एक धार्मिक आयोजन (religious event) थी, बल्कि यह सनातन धर्म (Sanatan Dharma) को मजबूत करने और समाज में जागरूकता फैलाने का एक मंच भी बनी। शास्त्री ने अपनी यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि वे तीन राज्यों के 400 से अधिक गांवों में सनातन की अलख जगाएंगे। उनका यह प्रयास न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
एक प्रेरणादायक संदेश
धीरेंद्र शास्त्री की हनुमान कथा (Dhirendra Shastri Hanuman Katha) ने पानीपत में हजारों लोगों को एकजुट किया और उन्हें धर्म, संस्कृति, और सामाजिक जिम्मेदारी (social responsibility) की ओर प्रेरित किया।
यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक (spiritual event) उत्साह से भरा था, बल्कि इसने लव जिहाद (Love Jihad) और हिंदू राष्ट्र (Hindu Rashtra) जैसे मुद्दों पर भी लोगों का ध्यान खींचा। अगर आप भी सनातन धर्म और श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेना चाहते हैं, तो शास्त्री के संदेश आपके लिए एक मार्गदर्शक हो सकते हैं।













