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Haryana will get water BBMB: हरियाणा को भाखड़ा डैम से मिलेगा 8500 क्यूसेक पानी, BBMB का बड़ा फैसला, पंजाब में AAP का विरोध तेज

On: May 1, 2025 9:46 AM
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Haryana will get water BBMB: हरियाणा को भाखड़ा डैम से मिलेगा 8500 क्यूसेक पानी, BBMB का बड़ा फैसला, पंजाब में AAP का विरोध तेज
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Haryana will get water BBMB: Haryana will get 8500 cusecs of water from Bhakra Dam: Big decision of BBMB, AAP’s opposition intensifies in Punjab: हरियाणा और पंजाब के बीच भाखड़ा डैम के पानी को लेकर चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने हरियाणा को तत्काल प्रभाव से 8500 क्यूसेक पानी देने का फैसला किया है।

इस निर्णय के बाद जहां हरियाणा में राहत की उम्मीद जगी है, वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने विरोध तेज कर दिया है। यह मुद्दा दोनों राज्यों के बीच सियासी तनाव को और गहरा सकता है। आइए, इस फैसले और इसके प्रभावों को विस्तार से समझते हैं।

BBMB का अहम फैसला Haryana will get water BBMB

बुधवार को BBMB की तकनीकी समिति की पांच घंटे की मैराथन बैठक में हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी देने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और केंद्र सरकार के बिजली व जल संसाधन मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल थे।

बहुमत के आधार पर यह फैसला हरियाणा के पक्ष में गया, जिसमें केंद्र और राजस्थान के प्रतिनिधियों का समर्थन अहम रहा। सूत्रों के अनुसार, गुरुवार शाम तक भाखड़ा डैम से हरियाणा के लिए पानी छोड़ा जा सकता है। यह फैसला हरियाणा के किसानों और आम लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा, जो लंबे समय से अपने हिस्से के पानी का इंतजार कर रहे थे।

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पंजाब का विरोध: AAP का घेराव प्लान

पंजाब सरकार ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उसका कहना है कि वह पहले से ही अपने कोटे से 4000 क्यूसेक पानी हरियाणा को दे रही है। अतिरिक्त 8500 क्यूसेक पानी देना पंजाब के किसानों और जल संसाधनों पर भारी पड़ सकता है। AAP ने इस फैसले को पंजाब की चिंताओं की अनदेखी करार दिया है। विरोध में AAP के विधायक और मंत्री हरियाणा में बीजेपी नेताओं के घरों और दफ्तरों का घेराव करने की योजना बना रहे हैं। पंजाब का मानना है कि यह फैसला उसके कानूनी हक को कमजोर करता है, जिससे सियासी तनाव और बढ़ सकता है।

पानी विवाद की पृष्ठभूमि

हरियाणा और पंजाब के बीच भाखड़ा डैम के पानी का बंटवारा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। 23 अप्रैल को हुई BBMB की पिछली बैठक में हरियाणा ने 8500 क्यूसेक पानी की मांग रखी थी, लेकिन पंजाब ने कोई औपचारिक मांग नहीं भेजी, जिसके कारण पानी नहीं छोड़ा गया।

आमतौर पर BBMB की तकनीकी समिति हर 15 दिन या एक महीने में पानी के बंटवारे पर फैसला लेती है। इस बार हिमाचल प्रदेश ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन केंद्र और राजस्थान के समर्थन से हरियाणा की मांग को हरी झंडी मिल गई। यह विवाद दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे की पुरानी तनातनी को फिर से उजागर करता है।

हरियाणा के लिए राहत, पंजाब की चिंता

हरियाणा के लिए यह फैसला एक बड़ी जीत है। भाखड़ा का पानी खेती और पेयजल के लिए महत्वपूर्ण है, और इसकी कमी से कई जिलों में संकट गहरा गया था।

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8500 क्यूसेक पानी मिलने से हरियाणा के किसानों को सिंचाई और आम लोगों को पेयजल की आपूर्ति में सुधार होगा। दूसरी ओर, पंजाब का मानना है कि यह फैसला उसके जल संसाधनों पर दबाव डालेगा, खासकर जब धान और अन्य फसलों के लिए पानी की जरूरत है। यह स्थिति दोनों राज्यों के बीच सियासी और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती है।

लोगों के लिए सुझाव

इस विवाद के बीच हरियाणा और पंजाब के लोगों को पानी का समझदारी से उपयोग करना होगा। हरियाणा में किसानों को ड्रिप इरिगेशन और अन्य जल-बचत तकनीकों को अपनाने की सलाह दी जाती है।

पंजाब के निवासियों को भी पानी की बर्बादी रोकने और स्थानीय प्रशासन से जल संरक्षण योजनाओं की जानकारी लेनी चाहिए। दोनों राज्यों के लोग अपने प्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर रचनात्मक बातचीत की मांग करें, ताकि दीर्घकालिक समाधान निकल सके।

भविष्य की राह

भाखड़ा डैम के पानी का बंटवारा हरियाणा और पंजाब के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है। BBMB का यह फैसला तात्कालिक राहत तो देगा, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए दोनों राज्यों को सहयोग और बातचीत की जरूरत है।

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केंद्र सरकार और BBMB की मध्यस्थता इस विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह समय है कि दोनों राज्य क्षेत्रीय एकता को प्राथमिकता दें और पानी जैसे महत्वपूर्ण संसाधन का उचित बंटवारा सुनिश्चित करें।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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