शहजादपुर, 17 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा सरकार की ‘संत-महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना’ के तहत रविवार को अंबाला के शहजादपुर में महाराणा प्रताप जयंती का राज्य स्तरीय समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और क्षेत्र के विकास सहित राजपूत समाज के गौरव को बढ़ाने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों को गति देने के लिए 5 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया। इसके साथ ही शहजादपुर के स्थानीय निवासियों की पुरानी मांग को पूरा करते हुए वहां के कच्चे नाले को पक्का करवाने की भी मंजूरी दी।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में शोध को मिलेगा बढ़ावा
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को बड़ी सौगात देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि यूनिवर्सिटी में महाराणा प्रताप के नाम पर एक विशेष अध्ययन केंद्र व चेयर की स्थापना की जाएगी। इससे आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और राष्ट्रभक्ति पर शोध कर सकेंगी। इसके अलावा, महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और इतिहास के गौरव को संजोने के लिए बड़ागढ़ के राजकीय महिला महाविद्यालय का नाम बदलकर महारानी पद्मावती राजकीय महाविद्यालय करने का आधिकारिक ऐलान किया गया। समाज के युवाओं की सुविधा के लिए राजपूत छात्रावास के निर्माण कार्य हेतु भी 31 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई।
महाराणा प्रताप न्याय व सच्चाई के प्रतीक
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महाराणा प्रताप ऐसे महान योद्धा थे जिनका नाम लेते ही रोम-रोम में देशभक्ति की लहर दौड़ने लगती है। उन्होंने घास की रोटियां खाना स्वीकार किया, लेकिन मुगलों के आगे कभी घुटने नहीं टेके। मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि राजपूत किसी एक जाति का नाम नहीं है, बल्कि यह समाज में न्याय, साहस और सच्चाई का एक प्रतीक है। देश की आन, बान और शान की रक्षा के लिए इस समाज ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने सेना के पराक्रम का जिक्र करते हुए हाल ही में मनाई गई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बरसी का भी हवाला दिया और देश की मजबूत रक्षा नीति की सराहना की।
युवाओं को दी कठिनाइयों से लड़ने की सीख
इस भव्य राज्य स्तरीय समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने महाराणा प्रताप की युद्ध नीति को बेजोड़ बताया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने जिस छापामार युद्ध शैली से मुगलों के दांत खट्टे किए थे, उसी कुशल रणनीति को आगे चलकर छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी अपनाया था। राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी धरोहर, संस्कृति और धर्म को कभी न भूलें। उनके मुताबिक, महाराणा प्रताप का जीवन सिखाता है कि कोई भी काम भावावेश में आकर नहीं, बल्कि पूरी सोच-समझ और रणनीति के साथ करना चाहिए, तभी विजय सुनिश्चित होती है।
12 पीढ़ियों के बलिदान और हल्दीघाटी के युद्ध को किया याद
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने महाराणा प्रताप और उनके पराक्रमी घोड़े ‘चेतक’ व हाथी ‘रामप्रसाद’ के त्याग की वीरगाथाएं साझा कीं। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक लड़ाई नहीं थी, बल्कि स्वाभिमान की वो हुंकार थी जिसने देश को झुकने नहीं दिया। श्याम सिंह राणा ने बताया कि महाराणा प्रताप से पूर्व उनकी 12 पीढ़ियों ने इस देश और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुतियां दी थीं। आज पूरा देश उनकी जयंती पर उन्हें पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ नमन कर रहा है।
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