Panipat rape case: 6-year-old girl brutalised in Panipat, neighbour accused: किशोरी से दुष्कर्म (Panipat rape case) का एक दिल दहलाने वाला मामला हरियाणा के पानीपत से सामने आया है। चांदनीबाग थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहने वाली दिव्यांग मां ने अपने पड़ोसी पर 6 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म (Rape) का गंभीर आरोप लगाया है।
यह घटना रविवार को हुई, जिसके बाद मां और बच्ची के साथ मारपीट (Assault) की गई और मकान मालिक ने उन्हें घर से निकाल दिया। पुलिस ने अब मामले की जांच (Investigation) शुरू की है। यह घटना समाज में बच्चों की सुरक्षा (Child safety) पर सवाल उठाती है।
मासूम के साथ हैवानियत और ब्लैकमेल का खेल Panipat rape case
पानीपत की एक कॉलोनी में रहने वाली दिव्यांग मां ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के हरदोई से है और भीख मांगकर अपने चार बच्चों का पालन-पोषण करती है। उनके सामने वाले कमरे में रहने वाला एक युवक बच्चों को टॉफी का लालच (Lure) देकर अपने पास बुलाता था।
रविवार को उनकी 6 साल की बेटी ने बताया कि पड़ोसी ने उसके साथ गलत काम (Misconduct) किया। मां ने जब इसकी शिकायत की, तो किसी ने विश्वास नहीं किया। मंगलवार को पड़ोसी ने बच्ची को कोई दवा दी, जिसके बाद उसे रक्तस्त्राव (Bleeding) शुरू हो गया। यह देख मां घबरा गई और बच्ची को लेकर सिविल अस्पताल पहुंची।
मकान मालिक की क्रूरता और पुलिस की कार्रवाई
मां ने बताया कि उन्होंने मकान मालिक को घटना के बारे में बताया, लेकिन मदद के बजाय मकान मालिक ने मां और बच्ची के साथ मारपीट (Assault) की और उन्हें घर से निकाल दिया। किला थाना पुलिस में शिकायत दर्ज की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
गुरुवार को बच्ची की हालत बिगड़ने पर मां उसे सिविल अस्पताल ले गई। चांदनीबाग थाना पुलिस ने अब मां के बयान दर्ज किए और जांच (Investigation) शुरू की। नारी तू नारायणी उत्थान समिति की अध्यक्षा सविता आर्य ने भी बच्ची का हाल जाना और दुष्कर्म (Rape) की आशंका जताई। पुलिस अब इस मामले में सख्त कार्रवाई (Police action) की तैयारी में है।
समाज में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना बच्चों की सुरक्षा (Child safety) और समाज में बढ़ते अपराधों (Crime) पर गंभीर सवाल उठाती है। मासूम बच्चों को लालच देकर अपराध करना और फिर परिवार को धमकाना (Threat) एक खतरनाक प्रवृत्ति है।
माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखने और उन्हें अजनबियों से सावधान रहने की शिक्षा देने की जरूरत है। साथ ही, प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। सामाजिक संगठनों और पुलिस को मिलकर जागरूकता (Awareness) फैलाने की जरूरत है, ताकि मासूम बच्चियां ऐसी हैवानियत का शिकार न हों।













