Sniffer dogs in jails: Sniffer dogs scam in Haryana jails: FIR against company director, strong action started: हरियाणा की जेलों में सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए तैनात स्निफर डॉग्स (sniffer dogs) से जुड़ा एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। जींद जिला कारागार सहित कई जेलों में मोबाइल फोन और ड्रग्स का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित इन कुत्तों को चंडीगढ़ की एक कंपनी को सौंपा गया था,
लेकिन प्रशिक्षण के बाद कुत्ते वापस न करने और लाखों रुपये के भुगतान के बावजूद धोखाधड़ी (fraud) के आरोप में कंपनी के निदेशक के खिलाफ जींद सिविल लाइन पुलिस थाने में FIR (FIR) दर्ज की गई है। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। आइए, इस सनसनीखेज मामले की पूरी कहानी को समझते हैं।
स्निफर डॉग्स घोटाला: कैसे शुरू हुआ मामला? Sniffer dogs in jails
हरियाणा कारागार विभाग ने जेलों में अवैध गतिविधियों, जैसे मोबाइल फोन और ड्रग्स की तस्करी, को रोकने के लिए स्निफर डॉग्स (sniffer dogs) को प्रशिक्षित करने का फैसला लिया था। इसके लिए चंडीगढ़ के सेक्टर-35 डी की कंपनी ईएसडी नेटवर्क इंडिया को चुना गया। 2 जनवरी 2020 को कंपनी ने पंजाब होमगार्ड कैनाइन ट्रेनिंग एंड ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट के साथ 23 कुत्तों को प्रशिक्षित करने का करार किया।
हरियाणा कारागार विभाग ने 13 कुत्तों के प्रशिक्षण के लिए 29 लाख 25 हजार रुपये का भुगतान किया, जो प्रति कुत्ता लगभग 2.25 लाख रुपये था। इसके अलावा, कुत्तों के भोजन और दवाओं के लिए प्रति कुत्ता 8,500 रुपये मासिक, पांच साल तक देने का समझौता था। लेकिन कंपनी ने न तो कुत्ते समय पर लौटाए और न ही करार का पूरी तरह पालन किया, जिसने इस घोटाले की नींव रखी।
प्रशिक्षण के बाद कुत्ते गायब
जनवरी 2021 में जींद जिला कारागार को स्निफर डॉग्स (sniffer dogs) भेजे गए थे, जिनमें से एक कुत्ते को प्रशिक्षण के लिए ईएसडी नेटवर्क इंडिया को सौंपा गया। लेकिन 15 महीने बीतने के बाद भी कुत्ता वापस नहीं लौटाया गया। हरियाणा कारागार विभाग ने 27 सितंबर 2024 से कंपनी को पत्र लिखकर कुत्तों को लौटाने की मांग शुरू की।
कई पत्रों के बाद कंपनी ने दावा किया कि भुगतान मिलने के एक सप्ताह में कुत्ते लौटा दिए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने 1.80 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी किया, लेकिन कंपनी ने फिर भी कुत्ते वापस नहीं किए। इस धोखाधड़ी (fraud) से तंग आकर जींद जिला कारागार के उपाधीक्षक सुरेंद्र सिंह ने सिविल लाइन पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की, जिसके आधार पर कंपनी के निदेशक सिमरत पाल सिद्धू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 314, 316, और 318 के तहत FIR (FIR) दर्ज की गई।
हरियाणा जेलों की सुरक्षा पर सवाल
यह घोटाला हरियाणा की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है। स्निफर डॉग्स (sniffer dogs) जेलों में अवैध सामान, जैसे ड्रग्स और मोबाइल फोन, का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
लेकिन इस तरह की धोखाधड़ी ने न केवल जेल प्रशासन की तैयारियों को कमजोर किया, बल्कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग भी किया। जींद जिला कारागार जैसे संस्थानों में पहले से ही संसाधनों की कमी है, और इस तरह के मामले स्थिति को और जटिल बनाते हैं। यह घटना यह भी दर्शाती है कि ठेके देने और उनकी निगरानी में पारदर्शिता की कितनी जरूरत है।
कंपनी की जवाबदेही पर सवाल
ईएसडी नेटवर्क इंडिया के निदेशक सिमरत पाल सिद्धू पर लगे धोखाधड़ी (fraud) के आरोप गंभीर हैं। कंपनी ने न केवल करार की शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि बार-बार झूठे वादे करके कारागार विभाग को गुमराह किया। यह सवाल उठता है कि ऐसी कंपनियों को इतने संवेदनशील कार्यों के लिए कैसे चुना गया? जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह केवल एक प्रशासनिक चूक थी या इसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र है।
कंपनी की जवाबदेही तय करना न केवल इस मामले को सुलझाने के लिए जरूरी है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
जेल प्रशासन और जनता के लिए सबक
यह मामला हरियाणा कारागार विभाग के लिए एक बड़ा सबक है। ठेके देने से पहले कंपनियों की विश्वसनीयता की गहन जांच और अनुबंध की शर्तों की सख्त निगरानी जरूरी है।
साथ ही, यह घटना जनता को भी सतर्क करती है कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कैसे हो सकता है। स्निफर डॉग्स (sniffer dogs) जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों का सही इस्तेमाल जेलों में अपराध को नियंत्रित करने और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जरूरी है। इस घोटाले ने यह दिखाया है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
आगे की राह
FIR (FIR) दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसियों पर सबकी नजरें हैं। यह देखना होगा कि कंपनी निदेशक के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और क्या लापता स्निफर डॉग्स को वापस लाया जा सकता है। यह मामला न केवल हरियाणा की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग भी करता है।
अगर आप हरियाणा के निवासी हैं, तो यह घटना आपको अपने स्थानीय प्रशासन से सवाल पूछने के लिए प्रेरित कर सकती है। आखिरकार, यह हमारा हक है कि हमारे टैक्स के पैसे का सही इस्तेमाल हो। यह समय है ऐसी धोखाधड़ी (fraud) को उजागर करने और व्यवस्था को सुधारने का।













