हिसार, Dussehra Festival Hisar: हिसार में दशहरा पर्व की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। श्री नृसिंह प्रह्लाद रामलीला सभा इस बार 77वां दशहरा महोत्सव धूमधाम से मनाने जा रही है। 22 सितंबर से शहर में रामलीला का रंग चढ़ेगा, जो बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी। इस बार रावण का 45 फीट, कुंभकर्ण का 40 फीट और मेघनाद का 38 फीट ऊंचा पुतला बनाया जा रहा है। रंग-बिरंगी लाइटों से सजे ये पुतले दहन के समय सबके आकर्षण का केंद्र होंगे।
रामलीला और बारात का शानदार आयोजन
दशहरा महोत्सव की शुरुआत 21 सितंबर को शाम 5 बजे मुलतानी चौक पार्क में झंडा महोत्सव के साथ होगी। 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक हर रात 7 से 10 बजे तक इसी पार्क में बड़े पर्दे पर रामलीला दिखाई जाएगी। सभा के कोषाध्यक्ष भीमसेन नारंग ने बताया कि 27 सितंबर को शाम 4 बजे मुलतानी चौक पार्क से भव्य राम बारात निकाली जाएगी। यह बारात पंजाबी धर्मशाला, राजगुरु मार्केट में पहुंचेगी, जहां 7-8 तरह की शानदार झांकियां पेश की जाएंगी। 2 अक्टूबर को शाम 5 बजे नई सब्जी मंडी में दशहरा महोत्सव का मुख्य समारोह होगा, जिसमें पुतलों का दहन होगा।
200 साल पुरानी परंपरा
सभा के प्रधान सुरेश कक्कड़ ने बताया कि यह परंपरा 1948 से चली आ रही है, जब पहली बार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए गए थे। इस संस्था की शुरुआत करीब 200 साल पहले पाकिस्तान के मुलतान शहर से हुई थी। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद यह परंपरा हिसार में शुरू हुई। डॉ. जयदयाल ठकराल और श्यामलाल चावला ने मुलतानी चौक पर रामलीला की नींव रखी। उस समय वहां सिर्फ खुला मैदान था, जो आज ऐतिहासिक पहचान बन चुका है।
हिसार में पर्दे पर रामलीला का जलवा
1948 से 1997 तक रामलीला का मंचन स्थानीय कलाकार करते थे। उस दौर में हजारों लोग इसे देखने पहुंचते थे। लेकिन 1997 के बाद से रामलीला बड़े पर्दे पर दिखाई जाने लगी। तब से लेकर आज तक यह परंपरा कायम है। लोग बड़े उत्साह से इसे देखने आते हैं। खास बात यह है कि सभा में आज तक प्रधान, उपप्रधान जैसे पदों के लिए कभी चुनाव नहीं हुआ। सभी का चयन सर्वसम्मति से होता है।












