करनाल. नेशनल हाईवे 44 पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर आई है। अक्सर टोल प्लाजा पर लंबी कतारों और बैरियर खुलने के इंतजार में काफी समय बर्बाद होता था। लेकिन अब करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा पर यह समस्या अतीत की बात हो जाएगी।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने यहां देश की सबसे आधुनिक टोल संग्रह प्रणाली यानी ‘मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम’ को लागू कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब आपको टोल टैक्स देने के लिए अपनी गाड़ी की रफ्तार धीमी करने या ब्रेक लगाने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होगी।
कैसे काम करता है यह जादुई सिस्टम
तकनीक की दुनिया में इसे एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा से पुराने बैरियर और बूथ हटा दिए गए हैं। उनकी जगह सड़क के ऊपर आधुनिक तकनीक से लैस बड़े ढांचे या ओवरहेड सिस्टम लगाए गए हैं।
जब आपकी गाड़ी इस सिस्टम के नीचे से गुजरेगी तो वहां लगे हाई रेजोल्यूशन कैमरे और सेंसर अपना काम करेंगे।
फास्टैग रीडर: यह रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक के जरिए चलती गाड़ी के फास्टैग को स्कैन कर लेगा।
नंबर प्लेट रीडर: एनपीआर कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को पढ़कर डेटाबेस से मिलान करेंगे।
वीडियो रिकॉर्डिंग: सुरक्षा के लिहाज से हर वाहन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी।
गुजरात और हरियाणा में शुरू हुआ ट्रायल
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में अभी इस तकनीक का ट्रायल चल रहा है जिसके लिए हरियाणा के करनाल और गुजरात को चुना गया है। बसताड़ा टोल पर सड़क के दोनों ओर लगभग 50 मीटर की दूरी पर चार अत्याधुनिक सिस्टम लगाए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेज रफ्तार में भी किसी गाड़ी की पहचान छूट न जाए और टोल वसूली 100 फीसदी सटीक रहे।
रफ्तार पर भी रहेगी तीसरी आंख की नजर
यह सिस्टम केवल टोल वसूलने तक सीमित नहीं है बल्कि यह सड़क सुरक्षा का भी काम करेगा। इस सिस्टम में लेजर कैमरे लगे हैं जो वाहनों की गति को रिकॉर्ड करते हैं। यदि कोई चालक निर्धारित गति सीमा से तेज गाड़ी चलाता हुआ पाया जाता है तो अगले 50 मीटर पर लगा दूसरा सिस्टम उसे पकड़ लेगा।
ऐसे में न केवल टोल कटेगा बल्कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर ऑनलाइन चालान भी जनरेट हो जाएगा। इसलिए चालकों को सलाह दी जाती है कि वे टोल फ्री होने के उत्साह में गति सीमा का उल्लंघन न करें।
समय और ईंधन दोनों की होगी बचत
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘फ्री फ्लो’ व्यवस्था के लागू होने से हाईवे पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी। पहले जहां पीक आवर्स में टोल पार करने में 10 से 15 मिनट लग जाते थे अब वह काम सेकंडों में हो जाएगा।
बार बार ब्रेक न लगाने और गाड़ी के स्टार्ट रहने से ईंधन की खपत भी कम होगी जो पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद है। यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसे देश के अन्य नेशनल हाईवे पर भी लागू किया जाएगा।













