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Fire wreaks havoc in Haryana: 650 एकड़ गेहूं की फसल राख, किसानों का छलका दर्द

On: April 19, 2025 9:13 AM
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Fire wreaks havoc in Haryana: 650 एकड़ गेहूं की फसल राख, किसानों का छलका दर्द
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Fire wreaks havoc in Haryana, 650 acres of wheat crop burnt to ashes: हरियाणा के किसानों पर मौसम की मार ने कहर बरपाया है। तेज आंधी और आगजनी की घटनाओं ने सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, कुरुक्षेत्र, और कैथल जैसे छह जिलों में 650 एकड़ से अधिक गेहूं की पकी फसल को राख में बदल दिया। मंडियों में हजारों टन गेहूं बारिश में भीग गया, और शनिवार को भी मौसम विभाग ने बारिश और आंधी का रेड अलर्ट जारी किया है। किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है, और वे सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। आइए, इस आपदा की पूरी कहानी जानते हैं।

आंधी और आग से तबाही Fire wreaks havoc in Haryana

शुक्रवार को हरियाणा में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी, जिसकी रफ्तार 50-60 किमी/घंटा थी, ने कई जिलों में तबाही मचाई। सिरसा में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जहां 250 एकड़ से अधिक गेहूं की फसल और फसल अवशेष (फाने) जलकर राख हो गए। आंधी के बीच आग इतनी तेजी से फैली कि प्रशासन को सिरसा एयरफोर्स स्टेशन से दमकल वाहन बुलाने पड़े।

फतेहाबाद के रतिया और कैथल के कैलरम में आगजनी में फसल के साथ-साथ कंबाइन मशीनें भी जल गईं। हिसार के बरवाला, बालसमंद, मय्यड़, और डाटा गांवों में आग और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। पानीपत में 13 एकड़ फसल और 30 एकड़ फाने जले, जबकि कुरुक्षेत्र के चंद्रभानपुर में आग आबादी तक पहुंच गई, जिससे लोगों को घर छोड़कर सड़कों पर आना पड़ा।

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मंडियों में भीगा गेहूं

मौसम की मार सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही। मंडियों में खुले में रखा हजारों टन गेहूं बारिश में भीग गया। किसानों ने तिरपाल से अनाज ढकने की कोशिश की, लेकिन भारी बारिश और आंधी ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। हिसार के बालसमंद में दिन में तापमान 43.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा था, लेकिन शाम को बारिश ने मंडियों को तरबतर कर दिया। प्रशासन की ओर से गेहूं की खरीद और भंडारण की धीमी प्रक्रिया ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ाईं। भीगा गेहूं अब गुणवत्ता खो सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का डर है।

शनिवार को रेड अलर्ट

मौसम विभाग ने शनिवार, 20 अप्रैल 2025 के लिए उत्तर हरियाणा में बारिश, आंधी, बिजली गिरने, और ओलावृष्टि का रेड अलर्ट जारी किया है। हिसार, यमुनानगर, सिरसा, फतेहाबाद, कैथल, बहादुरगढ़, जींद, रोहतक, और सोनीपत जैसे जिलों में बारिश की संभावना है। कई जिलों के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। यह चेतावनी किसानों के लिए और चिंता लेकर आई है, क्योंकि खेतों में बची फसल और मंडियों में रखा गेहूं और नुकसान झेल सकता है। बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

किसानों का दर्द

किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत और पूंजी दोनों इस आपदा में डूब गई। सिरसा के लुदेसर और रूपाना खुर्द के किसानों ने ट्रैक्टर और हैरो से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज आग पर काबू नहीं पाया जा सका। कई किसानों ने कर्ज लेकर फसल उगाई थी, और अब यह नुकसान उनकी उम्मीदों को तोड़ रहा है। ओलावृष्टि और बारिश ने पकी फसल को बर्बाद कर दिया, जबकि मंडियों में भीगा गेहूं उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है। किसान सरकार से तत्काल मुआवजे और मंडियों में बेहतर प्रबंधन की मांग कर रहे हैं।

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सरकार और प्रशासन के लिए सुझाव

इस संकट में सरकार और प्रशासन को तुरंत कदम उठाने होंगे। मंडियों में गेहूं को बचाने के लिए तिरपाल, अस्थायी शेड, और तेजी से भंडारण की व्यवस्था की जानी चाहिए। फसल नुकसान का आकलन कर किसानों को जल्द मुआवजा देना होगा। भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए मौसम चेतावनी पर त्वरित कार्रवाई और मंडियों में बेहतर इंतजाम जरूरी हैं।

किसानों के लिए सुझाव

किसानों को सलाह दी जाती है कि वे भीगे गेहूं को जल्द सुखाएं ताकि गुणवत्ता और नुकसान कम हो। स्थानीय कृषि कार्यालय से संपर्क कर नुकसान का आकलन करवाएं और मुआवजे के लिए आवेदन करें। मंडियों में गेहूं रखा है तो प्रशासन से तिरपाल की मांग करें। मौसम की ताजा जानकारी के लिए IMD की वेबसाइट या ऐप का उपयोग करें।

हरियाणा के किसानों का संकट

यह आपदा हरियाणा के किसानों के लिए एक बड़ा झटका है। आंधी, आग, और बारिश ने उनकी मेहनत को बर्बाद कर दिया है। सरकार को अब किसानों के साथ खड़े होकर उनकी मदद करनी होगी। समय पर सहायता और बेहतर प्रबंधन से ही किसानों का भरोसा बहाल हो सकता है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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