Budh Pradosh Vrat: Today is Budh Pradosh Vrat! Auspicious time and method of worshiping Lord Shiva and Lord Ganesha, know everything: नई दिल्ली | हरियाणा सहित देशभर में आज, 20 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह का पहला बुध प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत भगवान शिव और उनके पुत्र गणपति को समर्पित है।
हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं, एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। चूंकि यह व्रत बुधवार को पड़ रहा है, इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन पूजा करने से सुख, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे जुड़ी खास बातें।
20 अगस्त का पंचांग और शुभ मुहूर्त Budh Pradosh Vrat
दृक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 20 अगस्त को दोपहर 1:58 बजे शुरू होगी और 21 अगस्त को दोपहर 12:44 बजे तक रहेगी।
इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:56 बजे से रात 9:07 बजे तक रहेगा। ध्यान दें कि राहुकाल दोपहर 12:24 बजे से 2:02 बजे तक रहेगा, इस दौरान पूजा से बचें। प्रदोष काल में पूजा और कथा पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।
बुध प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव को बेहद प्रिय है, और बुधवार को पड़ने की वजह से यह गणपति से भी जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है, सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष का मार्ग खुलता है। यह व्रत दांपत्य जीवन की समस्याओं को दूर करने में भी मददगार है। पूजा के बाद कथा सुनना और अन्न दान करना इस व्रत का विशेष हिस्सा है।
प्रदोष काल का समय
20 अगस्त को प्रदोष काल शाम 6:56 बजे से रात 9:07 बजे तक रहेगा। इस समय में भगवान शिव और गणपति की पूजा करें, कथा का पाठ करें और आरती के बाद प्रसाद बांटें। पूजा के बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न दान करें। अगले दिन पारण करके व्रत पूरा करें। यह व्रत आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत की पूजा विधि बेहद सरल है। सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और आटा, हल्दी, रोली, चावल और फूलों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें। कुश के आसन पर बैठकर भगवान शिव को दूध, दही, शहद, घी और जल से स्नान कराएं।
फिर बेलपत्र, माला-फूल, इत्र, जनेऊ, अबीर, जौं, गेहूं, काला तिल और शक्कर अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर प्रार्थना करें। गणपति को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर सिंदूर-घी का लेप करें और दूर्वा, मोदक, सुपारी-पान और फूल चढ़ाएं। अंत में ॐ नमः शिवाय और ॐ गं गणपतये नमः मंत्रों का जाप करें।













