चंडीगढ़, 22 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। गर्मियों का मौसम अब पहले जैसा सामान्य नहीं रहा, बल्कि यह हर साल नए और डराने वाले रिकॉर्ड बना रहा है। इस तपती धूप और उमस के बीच देश में Heat Stroke यानी लू का खतरा तेजी से पैर पसार रहा है। लोग अक्सर शुरुआती थकान या डिहाइड्रेशन समझकर इसे हल्के में छोड़ देते हैं, जो बाद में बेहद घातक साबित होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो जब मानव शरीर अपने अंदरूनी तापमान को नियंत्रित करने में पूरी तरह फेल हो जाता है, तब हीट स्ट्रोक का अटैक होता है। ऐसी स्थिति में शरीर का तापमान कुछ ही मिनटों में जानलेवा स्तर तक बढ़ जाता है, जिससे मरीज की जान पर बन आती है।
जानिए कब और क्यों यह स्थिति हो जाती है जानलेवा
हीट स्ट्रोक को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है, क्योंकि यह शरीर के कूलिंग सिस्टम के ठप होने से पैदा होती है। आम दिनों में शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है, लेकिन जब बाहर का तापमान 104°F (40°C) को पार कर जाता है, तो पसीना आना बंद हो जाता है। लंबे समय तक धूप में रहने, पानी की भारी कमी होने या इस मौसम में हैवी फिजिकल एक्टिविटी करने से यह समस्या ट्रिगर होती है। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से शुगर या दिल की बीमारी से पीड़ित लोग इसके सबसे आसान शिकार बनते हैं।
45 डिग्री का हीट इंडेक्स बनते ही पैदा होता है मौत का जाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचता है और हवा में नमी यानी उमस बढ़ जाती है, वैसे ही खतरा दोगुना हो जाता है। जब महसूस होने वाला तापमान (हीट इंडेक्स) 45 डिग्री या उससे ऊपर जाता है, तो अंगों का काम करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि कड़कड़ाती धूप वाले घंटों में, यानी दोपहर 12 से 4 बजे के बीच सीधे धूप के संपर्क में आने से बचने की सख्त हिदायत दी जाती है। लगातार कई दिनों तक ऐसी भीषण गर्मी झेलने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी जवाब दे देती है।
शरीर के इन शुरुआती इशारों को कभी न करें नजरअंदाज
राहत की बात यह है कि हीट स्ट्रोक अचानक हमला नहीं करता, बल्कि शरीर इससे पहले कई तरह के लाल संकेत (Red Flags) देता है। इन लक्षणों में शरीर का भयंकर गर्म होना, असहनीय सिरदर्द, चक्कर आना, अचानक पसीना आना रुक जाना और भ्रम की स्थिति पैदा होना शामिल हैं। इसके अलावा मरीज की धड़कनें बहुत तेज हो जाती हैं, सांस फूलने लगती है और गंभीर मामलों में व्यक्ति बेहोश होकर गिर पड़ता है। इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत सतर्क होना बेहद जरूरी है।
Heat Stroke के लक्षण दिखते ही तुरंत करें ये उपाय, बच सकती है जान
यदि आपके आसपास किसी भी व्यक्ति में लू या हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो बिना एक पल गंवाए प्राथमिक उपचार शुरू कर देना चाहिए। सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति को धूप से हटाकर तुरंत किसी छांव वाले स्थान, एसी या कूलर के सामने ले जाएं। उसके तंग कपड़ों को ढीला करें और पूरे शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखना शुरू करें। अगर मरीज पूरी तरह होश में है, तो उसे धीरे-धीरे पानी, नींबू पानी या ओआरएस (ORS) का घोल पीने के लिए दें और तुरंत डॉक्टर या एम्बुलेंस को कॉल करें।
क्यों बेकाबू हो रहे हैं आंकड़े और क्या है इससे बचने का रास्ता
जानकारों का साफ कहना है कि कंक्रीट के जंगलों में बदलते शहर, घटते पेड़-पौधे और प्रदूषण के कारण शहरों का तापमान अब सामान्य से कहीं ज्यादा महसूस होने लगा है। यही वजह है कि अब अप्रैल और मई के महीने में ही जून जैसी जानलेवा गर्मी पड़ रही है। इस जानलेवा मौसम से बचने का एकमात्र उपाय सिर्फ और सिर्फ सख्त सतर्कता है। गर्मी के इस पूरे सीजन में बिना काम धूप में निकलने से बचें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और हर छोटी शारीरिक परेशानी को गंभीरता से लेकर तुरंत आराम करें।
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