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Sattu benefits: जब चिलचिलाती गेल्या में जाड्या का अहसास करावै अपना देसी सुपरफूड

On: मई 22, 2026 2:11 अपराह्न
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Sattu benefits: जब चिलचिलाती गेल्या में जाड्या का अहसास करावै अपना देसी सुपरफूड
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चंडीगढ़, 22 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। Jau ka Sattu VS Chana Sattu: भाई रे, जेठ-बैसाख का महीना शुरू होते ही जब सूरज दादा आग बरसाण लाग ज्यां, तो एसी-कूलर भी हाथ खड़े कर दिया करैं। इस चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों में जब जीव घबराण लागै, तो अंग्रेजी कोल्ड-ड्रिंक और महंगे जूस फैल हो ज्यां हैं। ऐसे टाइम पै अपनी हरियाणा की माटी और रसोइयों में एक पुराना और कसूता देसी इलाज याद आवै है, जिसे हम कहें ‘सत्तू’। बिहार और यूपी तें शुरू होया यो देसी ड्रिंक इब अपने हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-NCR के गाम-गाम और शहर-शहर में पूरी धमक जमा चुका है। पर इबकी बार भाई, सत्तू पीण वाले दो धड़ों में बंट रहे हैं एक कहैं जौ का सत्तू कसूता है, तो दूसरे चने के सत्तू नै नंबर वन बतावैं। चालो आज थारा यो संशय भी दूर कर देवां कि थारे खातिर कौण सा सत्तू कसूता बैठैगा।

तेज गर्मी में सत्तू ए क्यूं है असली ‘बाहुबली’?

सत्तू कोई मामूली चीज कोन्या, यो तो भुने होए अनाज नै पीस कै त्यार करा गया साक्षात अमृत है। इसनै ठंडे पानी में गाड़ कै, थोड़ा नींबू, काला नमक, भुना जीरा या फिर खांड-गुड़ मिला कै जब घूंट-घूंट पीया जावै, तो कालजे में एकदम ठंडक पड़ ज्या है। सत्तू की सबसे बड़ी खासियत यो है कि यो पेट में जांदे ए ‘कूलिंग एजेंट’ की ढाल काम करै है और शरीर नै डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) तें बचावै है। इसमें कसूता फाइबर, प्रोटीन और मिनरल्स होवैं हैं, जो तड़क-भड़क वाली गर्मी में भी थारे भीतर कमजोरी और सुस्ती नी आण देते।

जौ का सत्तू: पेट की गर्मी का पक्का ‘इलाज’

जौ यानी बारले के सत्तू नै तो आयुर्वेद में भी गर्मी का सबसे बड़ा तोड़ बताया गया है। इसकी तासीर एकदम ठंडी (शीतल) होवै है, जो बाहर तें आए माणस नै लू की चपेट में आण तें बचा लेवै है।

वजन घटाण में नंबर वन: जौ के सत्तू में फाइबर ठोक कै होवै है। एक गिलास पी लिया तो पेट कई ढाल भरा-भरा रहैगा, जिससे फालतू की भूख कोन्या लागै और वजन अपने आप काबू में रहैगा।

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हाजमे का डॉक्टर: जो भाई कब्ज, गैस और खट्टी डकारों तें परेशान रहवैं हैं, उनके खातिर यो सत्तू वरदान है। यो पचन में कति हल्का होवै है और ब्लड शुगर नै भी अचानक कोन्या बधाता।

चने का सत्तू: पहलवानों और जिम वाले भाइयों की पहली पसंद

दूसरी तरफ है भुने होए चने का सत्तू, जो ताकत और पोषण का साक्षात अखाड़ा है। चने में जो प्रोटीन होवै है, वो महंगे-महंगे अंग्रेजी प्रोटीन डिब्बों नै कति पीछे छोड़ देवै है।

मसल्स खातिर कसूता: जो गाम के छोरे जिम जावैं हैं या अखाड़े में डंड-बैठक मारैं हैं, उनके खातिर चने का सत्तू सबसे बढ़िया देसी प्रोटीन शेक है। यो मांसपेशियों नै मजबूत करै है।

पूरे दिन की एनर्जी: यो पेट में धीरे-धीरे पचै है, जिससे शरीर नै पूरे दिन काम करण की कसूती एनर्जी मिलती रहै है। तड़कै एक गिलास पी कै निकल जाओ, तो दोपहर तक भूख की छुट्टी।

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तो भाई, थारे खातिर कौण सा बैठैगा कसूता?

इब बात आवै है कि थमनै कौण सा सत्तू चूज करना चाहिए, तो यो कति थारी बॉडी और काम पै निर्भर करै है। जे थारा काम ऑफिस में बैठण का है, थमनै पेट में ठंडक चाहिए, वजन घटाणा है और लू तें बचना है, तो जौ का सत्तू थारे खातिर बेस्ट चॉइस है।

पर जे थारा काम भाग-दौड़ का है, थू कसूती मेहनत करै है, जिम या अखाड़े में पसीना बहावै है या शरीर में कमजोरी महसूस होवै है, तो चने का सत्तू थारे खातिर कसूता टॉनिक साबित होगा। इन कैमिकल वाले ठंडे और अंग्रेजी ड्रिंक्स पै पैसे फूंकण की बजाय अपनी देसी रसोई का यो सत्तू अपनाओ, और इस गर्मी में भी जाड्या का अहसास पाओ।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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