Insulin Resistance Symptoms Hindi: क्या भरपेट खाना खाने के मात्र एक-दो घंटे बाद आपको फिर से भूख सताने लगती है? पेट भरा होने के बावजूद कुछ न कुछ खाते रहने का मन करता है और साथ में पेट फूलने (Bloating) की समस्या बनी रहती है? हममें से अधिकतर लोग इसे अपनी ज्यादा खाने की आदत या सामान्य पाचन विकार मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस इसे खतरे की घंटी मानता है। अगर यह आपके साथ रोज हो रहा है, तो यह शरीर के भीतर पनप रही ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ (Insulin Resistance) की समस्या हो सकती है। इस विषय पर हमने सीनियर कंसल्टेंट फिजीशियन और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. जी. कृष्णा मोहन रेड्डी और सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से विस्तार से बात की।
कोशिकाओं तक क्यों नहीं पहुंच रही ऊर्जा?
हम जो भी भोजन करते हैं, पाचन तंत्र उसे ग्लूकोज में बदल देता है जो शरीर को ऊर्जा देता है। इंसुलिन हार्मोन का मुख्य काम इस ग्लूकोज को रक्त से निकालकर कोशिकाओं तक पहुंचाना है। डॉ. जी. कृष्णा मोहन रेड्डी बताते हैं कि जब शरीर इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रहता, तो यह प्रक्रिया बाधित होती है। ऐसी स्थिति में खून में शुगर तो मौजूद रहती है, लेकिन शरीर के सेल्स को ऊर्जा नहीं मिल पाती। नतीजतन, दिमाग इसे ‘ऊर्जा की कमी’ समझता है और शरीर को बार-बार खाने का सिग्नल भेजता है। यही वह मुख्य कारण है जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस के मरीजों को बार-बार भूख लगती है।
भूख और तृप्ति के हार्मोन का बिगड़ता खेल
इंसुलिन का प्रभाव केवल ब्लड शुगर तक सीमित नहीं है, यह हमारी भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स को भी सीधे प्रभावित करता है। जब शरीर में इंसुलिन का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो हार्मोनल बैलेंस पूरी तरह बिगड़ जाता है। मुख्य रूप से दो हार्मोन्स पर इसका असर पड़ता है:
घ्रेलिन (Ghrelin): यह भूख बढ़ाता है। सामान्य स्थिति में खाने के बाद इसका स्तर गिरना चाहिए, लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस में यह कम नहीं होता।
लेप्टिन (Leptin): यह दिमाग को पेट भरने का संकेत देता है। इस स्थिति में दिमाग लेप्टिन के संकेतों को पढ़ना बंद कर देता है।
डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के अनुसार, जब इन हार्मोन्स का तालमेल बिगड़ता है, तो व्यक्ति को पर्याप्त भोजन के बाद भी संतुष्टि (Satiety) नहीं मिलती। इस वजह से लोग जरूरत से ज्यादा खाना शुरू कर देते हैं, जिससे पेट में गैस, भारीपन और ब्लोटिंग की समस्या खड़ी हो जाती है।
मीठा खाने की क्रेविंग और अन्य हार्मोन
डॉक्टर्स ने बताया कि शरीर में जीएलपी-1 (GLP-1) और सीसीके (CCK) जैसे अन्य महत्वपूर्ण हार्मोन भी होते हैं। इनका काम खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास कराना है। लेकिन इंसुलिन लेवल गड़बड़ होने पर इनकी कार्यक्षमता कमजोर पड़ जाती है। इस स्थिति में व्यक्ति को लगता है कि खाना बहुत जल्दी हजम हो गया है। साथ ही, उसे मीठा या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट खाने की तीव्र इच्छा (Cravings) होती है। धीरे-धीरे यह पैटर्न वजन बढ़ाने और पेट में लगातार भारीपन का प्रमुख कारण बन जाता है।
बढ़ता वजन और डायबिटीज की आहट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अगर इंसुलिन रेजिस्टेंस के इन संकेतों को समय रहते नहीं पहचाना गया, तो यह भविष्य में प्रीडायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज में तब्दील हो सकता है। डॉ. रेड्डी चेतावनी देते हैं कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं, जैसे-
लगातार थकान महसूस होना।
खाना खाने के बाद तेज नींद आना।
बार-बार भूख लगना और पेट का फूलना।
ये लक्षण ही भविष्य में गंभीर बीमारी की नींव रखते हैं, इसलिए इनका निदान जरूरी है।
लाइफस्टाइल बदलकर पाएं काबू
अच्छी खबर यह है कि सही जीवनशैली अपनाकर इंसुलिन रेजिस्टेंस को काफी हद तक रिवर्स या कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए अपने आहार में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं और संतुलित भोजन लें। नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें, क्योंकि इससे शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है। डॉ. श्रेय श्रीवास्तव सलाह देते हैं कि वजन को नियंत्रित रखें और मीठे व प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। जब इंसुलिन का स्तर संतुलित होगा, तो भूख और तृप्ति के हार्मोन भी सामान्य रूप से काम करेंगे और भारीपन से राहत मिलेगी।
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