Sawan ke pehle somvar ki vrat katha in hindi Sawan Monday fasting story Shiva performed a miracle due to the blessings of a money lender: हर साल सावन के महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार को शिवभक्त बड़े ही श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते हैं। इस दिन की पूजा और व्रत जितना पवित्र होता है, उतनी ही अद्भुत होती है सावन सोमवार व्रत कथा।
यह सिर्फ एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि उस भक्ति का प्रतीक है जो भगवान शिव को उनके सच्चे भक्तों से जोड़ती है। आइए सुनते हैं साहूकार की वो कहानी, जो विश्वास, तपस्या और वरदान की अद्भुत मिसाल है।
सावन सोमवार की व्रत कथा में साहूकार के बेटे को जीवनदान मिलना इस बात का प्रमाण है कि शिवभक्ति में शक्ति है। इस कथा को पढ़ने और व्रत करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस व्रत की महिमा भगवान शिव की कृपा और पार्वती जी के प्रेम से जुड़ी है।
Sawan ke pehle somvar ki vrat katha: एक साहूकार की श्रद्धा
एक धनी साहूकार था, जिसके पास धन की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान ना होने का दुःख उसे लगातार सताता था। वह हर सोमवार को शिवजी का व्रत रखता, पूजा करता और मंदिर में दीप जलाता। उसकी निष्ठा को देख पार्वती जी ने शिवजी से उसकी इच्छा पूरी करने की प्रार्थना की। शिवजी ने कर्मफल का संदर्भ दिया, लेकिन पार्वती जी के आग्रह पर उन्होंने साहूकार को पुत्र का वरदान दिया—हालांकि ये पुत्र केवल बारह वर्ष तक ही जीवित रहेगा।
जैसे ही साहूकार का पुत्र जन्मा, पूरे घर में खुशियों की लहर दौड़ गई। लेकिन साहूकार को ज्ञात था कि उसका बेटा 12 साल के बाद नहीं रहेगा। इसलिए उसने उसे विवाह से दूर रखा और काशी पढ़ने भेज दिया। रास्ते में यज्ञ करते हुए मामा-भांजे एक नगर पहुंचे, जहाँ राजकुमारी का विवाह होना था। किस्मत ने खेल ऐसा रचा कि साहूकार का पुत्र वहाँ वर बना और राजकुमारी से विवाह कर बैठा।
शिव-पार्वती की कृपा से मृत्यु पर विजय
कहीं और कथा नायिका राजकुमारी ने उस विवाह को पहचान लिया और काने राजकुमार को अस्वीकार कर दिया। उधर बालक काशी में यज्ञ के दिन मृत्यु को प्राप्त हो गया। मामा का रोना शिव-पार्वती तक पहुंचा। पार्वती के फिर से आग्रह पर शिवजी ने बालक को जीवनदान दे दिया। यही वो चमत्कार है जो इस व्रत को ‘मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला’ बनाता है।
शिक्षा पूरी कर बालक अपने मामा के साथ लौटता है। विवाह स्थल पर उसे पहचान कर सम्मानित किया जाता है। घर पहुंचकर माता-पिता को विश्वास ही नहीं होता कि उनका बेटा जीवित है। व्रत, श्रद्धा और कथा के माध्यम से हर वर्ष लाखों भक्त इस शिव-कृपा को अनुभव करते हैं।













