Guru Nanak Jayanti Essay in hindi: गुरु नानक जयंती भारत में मनाए जाने वाले सबसे प्रमुख पर्वों में से एक है। सिखों के गुरू गुरुनानक देव समाज में क्रांति, प्रेरणा और आध्यात्म की लहर लाने वाले महात्मा थे। गुरु नानक जयंती इस बार 5 नवंबर को मनाई जाएगी।
स्कूलों में इस अवसर पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन होता है तो हम आपको शानदार निबंध लिखने का तरीका बता रहे हैं। इस दिन सिख समुदाय से जुड़े लोग सुबह प्रभात फेरी निकालते हैं। इसके अलावा गुरुद्वारे में कीर्तन और लंगर का आयोजन भी होता है। गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में भी जाना जाता है।
Guru Nanak Jayanti Essay
गुरुनानक जयंती के अवसर पर कई स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है और इन्हीं में से एक है निबंध प्रतियोगिता, जिसमें गुरुनानक देव पर निबंध लिखना होता है। ऐसे में यहां पर कुछ खास टिप्स दिए जा रहे हैं, जो आपके निबंध में चार चांद लगा सकते हैं।
Guru Nanak Jayanti Nibandh: गुरु नानक जयंती पर निबंध
सिख धर्म के प्रवर्तक और प्रथम गुरू (गुरू नानक देव) जी का जन्म 14 अप्रैल 1469 को लाहौर के तलवंडी में हुआ। आज की तारीख में यह स्थान पाकिस्तान में है। इनके पिताजी का नाम कल्याणचंद था, जो एक कास्तकार थे। जब नानक 16 वर्ष के हुए तो इनका विवाह हो गया, इनको दो पुत्र प्राप्त हुए जिनका नाम श्रीचंद और लक्ष्मीचंद था। गुरू नानक देव जी की गिनती भक्ति काल के कवियों में भी की जाती है।
गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की नींव रखी और लोगों को जात-पात, ऊंच-नीच, धर्म और समुदाय के भेदभाव से ऊपर उठने की प्रेरणा दी। उनका संदेश था- “एक ओंकार सतनाम”, अर्थात ईश्वर एक है और सत्य ही उसका नाम है।
उन्होंने कई रचनाएं भी कीं। सिखों के पहले गुरू (गुरू नानक देव) को उनके अनुयायी गुरु नानक, बाबा नानक और नानक शाह जैसे कई नाम से पुकारते हैं।
यही कारण है कि तलवंडी का नाम बदलकर नानक साहब कर दिया गया। बचपन से ही इनका झुकाव आध्यात्मिकता की तरफ था इसलिए इन्हें स्कूल जाना पसंद नहीं था और केवल 18 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और अपना पूरा जीवन ईश्वर की भक्ति में समर्पित कर दिया। नानक देव ने परम्परागत रूप से चली आ रही मूर्ति पूजा का विरोध किया जबकि सर्वेश्वरवाद का समर्थन किया। उन्होंने सनातन में एकेश्वरवाद यानी अलग-अलग ईश्वर को मानने की बजाय एक ही ईश्वर का ध्यान करने का संदेश दिया।
गुरु नानक देव के जीवन का अंतिम पड़ाव
जीवन भर मानवता एवं एक ईश्वर की प्रार्थना का संदेश देने वाले नानक देव को सर्वाधिक ख्याति जीवन के अंतिम वर्षों प्राप्त हुई। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा यात्रा करते हुए व्यतीत किया, उन्होंने करतारपुर में एक विशाल धर्मशाला का निर्माण करवाया और यहीं करतारपुर में उन्होंने अपने शरीर का त्याग किया।
यही कारण है कि आज भी पाकिस्तान के करतारपुर में गुरुद्वारा भी है, जहां हर साल कई भारतीय जाते हैं। गुरु नानक देव जी का जीवन सादगी, करुणा और सेवा का प्रतीक है। उन्होंने समाज में प्रेम, भाईचारा और एकता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी मानवता को सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।












