Shauchalay Meaning in Hindi : अक्सर लोग रोजमर्रा की जिंदगी में टॉयलेट या शौचालय शब्द का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपे गहरे वैज्ञानिक और पारंपरिक अर्थ से अनजान रहते हैं। संस्कृत और हिंदी के नियमों के मुताबिक शौचालय शब्द दो शब्दों के मेल से बना है। इसमें ‘शौच’ का मतलब पेट की सफाई, मलत्याग और पवित्रता होता है, जबकि ‘आलय’ का अर्थ स्थान या घर होता है। प्राचीन भारत में शौच की प्रक्रिया को केवल पेट खाली करने तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि इसे शारीरिक, मानसिक और ऊर्जात्मक शुद्धि की एक बेहद जरूरी प्रक्रिया का दर्जा दिया गया था।
बाहर शौच के लिए जाने के पीछे छिपा था सेहत का राज
ऋषि-मुनियों के दौर में लोग सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर खेतों या गांवों से बाहर प्रकृति के बीच फ्रेश होने जाते थे। पुराने समय में घरों में टॉयलेट न होने के पीछे एक गहरा वैज्ञानिक कारण काम करता था। सुबह के वक्त खुले वातावरण में मिलने वाली ताजी प्राणवायु और सूर्योदय की शुरुआती ऊर्जा से पेट की स्वाभाविक गति तेजी से सक्रिय होती थी। खुले और शांत माहौल में रहने से मन एकाग्र रहता था, इसलिए प्राचीन लोग इस समय को पूरे दिन के कार्यों की प्लानिंग करने का सबसे बेहतरीन वक्त मानते थे। प्राचीन शास्त्रों में बकायदा श्लोक के जरिए कहा गया है कि बाहरी और भीतरी शुद्धि ही उत्तम स्वास्थ्य का सबसे बड़ा आधार है।
टॉयलेट में मोबाइल और अखबार का इस्तेमाल है खतरनाक
आजकल के दौर में लोगों की सबसे गंदी आदत टॉयलेट सीट पर बैठकर मोबाइल स्क्रॉल करना, गाने सुनना या अखबार पढ़ना बन चुकी है। आयुर्वेद और सनातन धर्मग्रंथों में इस तरह के कृत्यों को सख्त तौर पर वर्जित और पूरी तरह प्रतिबंधित माना गया है। चिकित्सकों के मुताबिक शौच के दौरान पूरा ध्यान केवल पेट साफ करने पर होना चाहिए और आंख-मुंह बंद रखने चाहिए। अगर आप टॉयलेट में ध्यान भटकाते हैं, तो इससे मस्तिष्क और शरीर की अपान वायु का प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है, जो आगे चलकर बवासीर और पुरानी कब्ज जैसी गंभीर बीमारियों की जड़ बनता है।
किस उम्र के व्यक्ति को टॉयलेट में कितना समय लगना चाहिए
आयुर्वेद भेषज्य ग्रंथ के नियम बताते हैं कि इंसान का शरीर जितना युवा होगा और उसकी पाचन अग्नि जितनी मजबूत होगी, मलत्याग उतना ही सहज और तेजी से होगा। ग्रंथों में उम्र के हिसाब से बकायदा समय निर्धारित किया गया है, जिसके अनुसार 12 वर्ष तक के बच्चों को शौच में केवल 1 से 2 मिनट का समय लगना चाहिए। 12 से 25 साल के युवाओं को 2 से 3 मिनट और 25 से 50 वर्ष की उम्र वालों को अधिकतम 3 से 5 मिनट के भीतर सीट से उठ जाना चाहिए। वहीं 50 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए 5 से 8 मिनट का समय पर्याप्त माना गया है। अगर किसी को इससे ज्यादा समय लग रहा है, तो यह पेट की मंदाग्नि या वात दोष का सीधा संकेत है।
Prayagraj Old Yamuna Bridge: प्रयागराज के इस पुल का पिलर नंबर 13 क्यों है जूते जैसा?
ब्रेकिंग न्यूज़ और Trending News अपडेट के लिए Haryana News Post से जुड़े रहें।












