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Agricultural News: सागवान की खेती: झारखंड के किसान ने बनाई 60 लाख की कमाई, बनी सफलता की मिसाल

On: मई 25, 2025 7:03 पूर्वाह्न
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Agricultural News: Teak cultivation: Jharkhand farmer earns 60 lakh rupees, becomes an example of success: झारखंड के हजारीबाग जिले के अमनारी गांव के किसान सुधांशु कुमार ने सागवान की खेती (teak farming) को अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि हजारों किसानों के लिए एक मिसाल भी कायम की।

परंपरागत धान और गेहूं की खेती को छोड़कर सुधांशु ने 10 कठ्ठा जमीन में सागवान के पेड़ लगाए और 12 साल की मेहनत के बाद 60 लाख रुपये की कमाई की। उनकी इस उपलब्धि में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम (drip irrigation) और सावधानीपूर्वक देखभाल ने अहम भूमिका निभाई। यह कहानी न केवल प्रगतिशील खेती की ताकत दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि आधुनिक तकनीकों के साथ किसान कैसे मालामाल बन सकते हैं।

सागवान की खेती: निवेश से मुनाफा Agricultural News

हजारीबाग जिला कृषि के क्षेत्र में हमेशा से अग्रणी रहा है, और यहां के किसान नए-नए प्रयोगों से अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। सुधांशु कुमार ने 12 साल पहले सागवान की खेती (teak cultivation) शुरू करने का फैसला लिया। उन्होंने अपनी 10 कठ्ठा जमीन पर 200 सागवान के पेड़ लगाए।

इन पेड़ों को तैयार होने में 11 साल लगे, और इस दौरान उनकी कुल लागत करीब 20 लाख रुपये रही। हालांकि, बारिश के मौसम में जलभराव (waterlogging) के कारण 25 पेड़ नष्ट हो गए, लेकिन बाकी 175 पेड़ों की कटाई ने उन्हें 60 लाख रुपये का मुनाफा दिलाया। यह राशि उनकी मेहनत और सही योजना का परिणाम है।

ड्रिप इरिगेशन: सागवान की सफलता का राज

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सागवान की खेती में शुरुआती तीन साल सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इस दौरान पेड़ों की जड़ें गहराई तक नहीं जातीं। गर्मियों में नियमित सिंचाई न होने पर पेड़ सूख सकते हैं, और बारिश में जलभराव से सड़ने का खतरा रहता है।

सुधांशु ने इस समस्या से निपटने के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम (drip irrigation system) का उपयोग किया, जिसने पानी की सही मात्रा पेड़ों तक पहुंचाई और उनकी देखभाल को आसान बनाया। इस तकनीक ने न केवल उनके पेड़ों को सुरक्षित रखा, बल्कि लागत को भी नियंत्रित किया। उनकी यह रणनीति अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

जलभराव से बचाव और देखभाल

सागवान की खेती में जलभराव (waterlogging issue) एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि ज्यादा पानी पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। सुधांशु ने बताया कि उन्होंने अपनी जमीन को इस तरह तैयार किया कि पानी का जमाव न हो।

इसके अलावा, उन्होंने शुरुआती वर्षों में पेड़ों की नियमित देखभाल की, जैसे समय पर खाद देना और कीटों से बचाव। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि 175 पेड़ पूरी तरह तैयार हुए और उन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिली। सुधांशु ने अब सागवान का दूसरा बैच भी लगाया है, जो चार साल का हो चुका है और भविष्य में भी अच्छी कमाई का वादा करता है।

किसानों के लिए सुधांशु की सलाह

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सुधांशु का मानना है कि परंपरागत खेती (traditional farming) अब उतनी लाभकारी नहीं रही। उन्होंने अन्य किसानों को सलाह दी कि वे खाली पड़ी जमीन, खासकर टांड़ जैसी भूमि पर सागवान की खेती करें। ऐसी जमीन में जलभराव की समस्या कम होती है, जो सागवान के लिए आदर्श है।

उन्होंने इसे एक दीर्घकालिक निवेश (long-term investment) बताया, जिसमें एक बार मेहनत और धैर्य से 10-12 साल में लाखों रुपये की कमाई हो सकती है। उनकी यह सलाह उन किसानों के लिए प्रेरणादायक है, जो अपनी आय बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रहे हैं।

प्रगतिशील खेती का भविष्य

सुधांशु की कहानी झारखंड के किसानों के लिए एक प्रेरणा है। हजारीबाग में सागवान की खेती (teak farming success) ने न केवल व्यक्तिगत स्तर पर सफलता की कहानियां लिखी हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि आधुनिक तकनीकों और सही योजना के साथ खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

उनकी सफलता से प्रेरित होकर जिले के कई अन्य किसान भी सागवान की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

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सुधांशु की कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत, धैर्य, और आधुनिक तकनीकों का सही उपयोग किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकता है।

सागवान की खेती को एक निवेश के रूप में देखकर किसान न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं। सरकार और कृषि विशेषज्ञों को ऐसी पहलों को प्रोत्साहन देना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक किसान इस तरह की प्रगतिशील खेती (progressive farming) को अपनाएं।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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