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Agriculture News: किसानों के लिए बड़ा मौका वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर मिलेगी सरकारी मदद

On: November 29, 2025 11:51 AM
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Agriculture News: किसानों के लिए बड़ा मौका वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर मिलेगी सरकारी मदद
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Agriculture News: सरकार वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर सब्सिडी देकर किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। योजना से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और लागत घटती है। फोकस कीवर्ड वर्मी कम्पोस्ट सब्सिडी

एग्रीकल्चर न्यूज किसानों को वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर सरकारी मदद Agriculture News

सरकार किसानों को ऑर्गेनिक खेती की ओर बढ़ाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर वित्तीय सहायता दे रही है। इस योजना से किसान कम लागत में प्राकृतिक खाद तैयार कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया आसान है और ऑनलाइन तथा कृषि विभाग के जरिए पूरी की जा सकती है। यह कदम मिट्टी की उर्वरता और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू

सीकर जिले में किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत है। गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं। इस योजना में वही किसान शामिल होंगे जिनके पास कम से कम तीन गोवंश हों। सरकार वर्मी कम्पोस्ट यूनिट बनाने पर दस हजार रुपए तक की सब्सिडी देगी। किसान साथी पोर्टल पर जनाधार, भू स्वामित्व, ई साइन, जमाबंदी और आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किए जा सकते हैं।

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जैविक खेती को बढ़ावा और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम

कृषि पर्यवेक्षक अजीत सिंह के अनुसार योजना का मुख्य उद्देश्य जैविक खेती को प्रोत्साहन देना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाना है। बढ़ते रासायनिक खाद के उपयोग ने मिट्टी की सेहत खराब की है। ऐसे में वर्मी कम्पोस्ट किसानों को प्राकृतिक खाद की ओर प्रेरित करता है। इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे बाजार में उत्पादों का मूल्य भी बढ़ जाता है।

वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के तय मानक

योजना के अनुसार किसानों को मानक आकार की कम्पोस्ट यूनिट बनानी होगी। पिट की लंबाई 20 फीट, चौड़ाई 3 फीट और गहराई 2 फीट होनी चाहिए। किसान चाहें तो 10 फीट लंबाई वाले दो अलग कंपोस्ट बेड भी बना सकते हैं। इन मापों का उद्देश्य जैविक खाद का नियमित और उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन सुनिश्चित करना है, ताकि रासायनिक खाद का उपयोग कम किया जा सके। तैयार खाद लंबे समय तक मिट्टी को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती है।

जैविक खेती की बढ़ती मांग और सरकारी सहायता

संयुक्त निदेशक कृषि का कहना है कि किसानों में जैविक खेती और नवाचारों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव के कारण जैविक खाद की मांग तेजी से बढ़ी है। जैविक तरीकों से खेती करने पर उत्पादन बढ़ता है और खेती की लागत भी घट जाती है। सरकार की सहायता और योजनाओं के चलते किसान अब प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।

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एक्सपर्ट की सलाह वर्मी कम्पोस्ट से फसल की गुणवत्ता बेहतर

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार जैविक खाद के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती। इससे खाद खरीदने का खर्च बचता है और लागत कम होती है। वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की संरचना को मजबूत बनाता है और सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करता है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं। उच्च गुणवत्ता वाली फसलों को बाजार में बेहतर कीमत मिलती है। राष्ट्रीय स्तर पर भी जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

सब्सिडी का लाभ और योजना की शर्तें

योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व होना जरूरी है। वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम दस हजार रुपए तक सब्सिडी दी जाएगी। जांच के बाद यूनिट के आकार और मानक के आधार पर सहायता प्रदान की जाएगी। विभाग का मानना है कि वर्मी कम्पोस्ट यूनिट बनने से किसान लंबे समय तक बिना अतिरिक्त खर्च प्राकृतिक खाद प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में मजबूत कदम है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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