चंडीगढ़, 17 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। देश के किसान डिजिटल दौर में अब खेती-किसानी का सामान भी ऑनलाइन खरीदने लगे हैं, लेकिन इसी भरोसे की आड़ में बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए Amazon, Flipkart, Meesho और JioMart को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन प्लेटफॉर्म्स पर “साइक्लोसिनोन हर्बिसाइड” (Cyclosinone Herbicide) नामक कृषि रसायन को बिना किसी वैध पंजीकरण और अनिवार्य मानकों के धड़ल्ले से बेचा और प्रमोट किया जा रहा था, जिससे सीधे तौर पर किसानों की फसलों और स्वास्थ्य को खतरे में डाला गया।
क्रॉप केयर फेडरेशन की शिकायत पर खुली पोल
इस गंभीर मामले का खुलासा तब हुआ जब क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (CCFI) ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय के माध्यम से एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में साफ किया गया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक रहा “साइक्लोसिनोन हर्बिसाइड” नाम का यह उत्पाद भारत सरकार के कीटनाशक अधिनियम 1968 (Insecticides Act 1968) की आधिकारिक सूची में दर्ज ही नहीं है। इसके बावजूद कंपनियां इसे असली और सुरक्षित बताकर बेच रही थीं। उत्पाद के विवरण में न तो इसके असली केमिकल की पहचान बताई गई थी और न ही इसके निर्माता के वैध लाइसेंस का कोई ब्योरा दिया गया था।
नोटिस मिलते ही कंपनियों में हड़कंप
CCPA का हंटर चलते ही चारों बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों ने आनन-फानन में अपने डिजिटल स्टोर से इस उत्पाद की लिस्टिंग को पूरी तरह हटा दिया है। इसके साथ ही इस फर्जीवाड़े में शामिल विक्रेताओं (Sellers) के खिलाफ आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, रेगुलेटर CCPA ने दो टूक कहा है कि सिर्फ वेबसाइट से प्रोडक्ट हटा लेना ही सजा से बचने के लिए काफी नहीं है। इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है कि यह अवैध उत्पाद कब से बाजार में बिक रहा था और इन नामचीन कंपनियों के सुरक्षा फिल्टर ने इसे पकड़ने में इतनी बड़ी कोताही क्यों बरती।
नियमों को ताक पर रखकर छिपाई गई रसायनों की सच्चाई
सरकारी जांच में सामने आया है कि इस हर्बिसाइड की ऑनलाइन लिस्टिंग में ग्राहकों को गुमराह करने का खेल चल रहा था। पैकेट और विवरण पर रासायनिक संरचना (Chemical Composition), वैध लाइसेंस नंबर, उसकी एक्सपायरी डेट और सबसे महत्वपूर्ण ‘खतरनाक रसायन’ होने की लाल या पीली त्रिकोणीय चेतावनी जैसी जरूरी चीजें गायब थीं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, किसान बिना पूरी जानकारी के ऐसे अनियंत्रित रसायनों का इस्तेमाल खेतों में कर देते हैं, जिससे पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो सकती है और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।
ई-कॉमर्स नियम 2020 के तहत कस रहा शिकंजा
सरकार ने सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए बने ‘इन्सेक्टिसाइड्स रूल्स 2022’ के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कोई भी कीटनाशक लिस्ट करने से पहले सेलर का कृषि विभाग से जारी लाइसेंस वेरीफाई करना अनिवार्य है। बिना जांच के ऐसे जानलेवा उत्पादों को बेचने की अनुमति देना उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 और ई-कॉमर्स नियम 2020 का संगीन उल्लंघन है। CCPA ने कहा है कि ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा और देश के कानूनों की कीमत पर किसी भी कंपनी को मनमानी करने की छूट नहीं दी जाएगी।
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