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Bargur Buffalo: तमिलनाडु की देसी नस्ल, 7 लीटर पौष्टिक दूध और पहाड़ी जीवन की शान

On: July 6, 2025 8:45 AM
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Bargur Buffalo: तमिलनाडु की देसी नस्ल, 7 लीटर पौष्टिक दूध और पहाड़ी जीवन की शान
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Bargur Buffalo: Native breed of Tamil Nadu, 7 liters of nutritious milk and pride of hill life: बरगुर भैंस (Bargur Buffalo) तमिलनाडु की एक अनूठी देसी नस्ल है, जो बारगुर पहाड़ियों की हरियाली में पनपती है। यह भैंस अपनी पौष्टिक दूध उत्पादन क्षमता (milk production) और कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने की ताकत के लिए जानी जाती है।

स्थानीय लोग इसे “मलाई एरुमई” कहते हैं, जिसका अर्थ है पहाड़ी भैंस। यह नस्ल न केवल दूध और गोबर के लिए उपयोगी है, बल्कि आदिवासी और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सहारा भी है। आइए, इस देसी नस्ल की विशेषताओं और महत्व को विस्तार से समझते हैं।

बरगुर भैंस की पहचान और उत्पत्ति Bargur Buffalo

बरगुर भैंस (Bargur Buffalo) मुख्य रूप से तमिलनाडु के एरोड जिले के अंथियूर तालुक में बारगुर पहाड़ियों (Bargur Hills) और आसपास के गांवों में पाई जाती है। इस नस्ल का नाम इसके मूल स्थान बारगुर से लिया गया है। इसका रंग भूरा-काला, सींग पीछे की ओर मुड़े हुए, और खुर ग्रे रंग के होते हैं।

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नर भैंसों की औसत ऊंचाई 108.27 सेमी और मादा भैंसों की 102.83 सेमी होती है। इनकी पूंछ और थूथन काले रंग के होते हैं। यह नस्ल अपनी चुस्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में चराई (grazing) की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय किसानों ने इसे पारंपरिक तरीकों से संरक्षित किया है।

दूध उत्पादन और उपयोग

बरगुर भैंस (Bargur Buffalo) का दूध उत्पादन अन्य नस्लों की तुलना में कम है, लेकिन इसकी गुणवत्ता बेजोड़ है। यह रोजाना 6-7 लीटर दूध देती है, जिसमें वसा की मात्रा (fat content) 8.59% तक होती है। यह पौष्टिक दूध (nutritious milk) दही और छाछ बनाने के लिए आदर्श है।

प्रति ब्यांत यह 700-1200 किलोग्राम दूध दे सकती है। पहली ब्यांत की औसत उम्र 46 महीने और ब्यांत अंतराल 16-18 महीने होता है। यह भैंस गोबर उत्पादन (manure production) के लिए भी उपयोगी है, जो खेती में काम आता है। इसका दूध स्थानीय घरेलू खपत के लिए महत्वपूर्ण है।

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पालन-पोषण और विशेषताएं

बरगुर भैंस को विस्तारित प्रणाली (extensive system) में पाला जाता है, जहां यह जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में चरती है। यह नस्ल कठोर जलवायु (harsh climate) और खड़ी ढलानों में आसानी से जीवित रहती है। इसके पालन के लिए कम संसाधनों की जरूरत होती है, जो इसे आदिवासी और सीमांत किसानों के लिए उपयुक्त बनाता है। प्रजनन के लिए “कोनान” नामक स्थानीय सांड़ का उपयोग होता है।

इसकी सहनशक्ति और जंगल में चरने की क्षमता इसे अन्य नस्लों से अलग करती है। यह नस्ल केवल बारगुर के वन क्षेत्रों में ही पनप सकती है, जो इसकी अनूठी विशेषता है।

बरगुर भैंस (Bargur Buffalo) तमिलनाडु की सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर का हिस्सा है। इस देसी नस्ल को संरक्षित करना न केवल किसानों, बल्कि जैव विविधता (biodiversity) के लिए भी जरूरी है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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