Beetroot farming Chukandar ki kheti: रायबरेली जिले के उद्यान विशेषज्ञ नरेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि चुकंदर की खेती किसानों के लिए दोहरा फायदा करती है। यह न सिर्फ अच्छी कमाई कराती है बल्कि मिट्टी में नमी बनाए रखकर अगली फसल के लिए उर्वरक का काम भी करती है।
गेहूं–सरसों के अलावा कोई नई और मुनाफे वाली फसल खोज रहे किसानों के लिए चुकंदर एक बेहतरीन विकल्प है।
सर्दी का मौसम: चुकंदर के लिए सबसे अच्छा समय Beetroot farming
चुकंदर सर्दियों की फसल है। यह मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ाती है और सालभर बाजार में इसकी मांग बनी रहती है।
सलाद, जूस, अचार और औषधीय उपयोगों में इसकी भारी खपत होती है, जिससे किसानों को गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से कई गुना ज्यादा आमदनी मिल सकती है।
कब करें बुवाई और किस मिट्टी में होता है बेहतर उत्पादन?
अक्टूबर से दिसंबर तक का वक्त चुकंदर की बुवाई के लिए सबसे उम्दा माना गया है।
फसल 90–100 दिनों में तैयार हो जाती है।
इसके लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी आदर्श है, बशर्ते जल निकासी अच्छी हो।
कैसे तैयार करें खेत?
खेत की जुताई दो से तीन बार करके मिट्टी को भुरभुरी बनाएं।
इसके बाद गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाएं ताकि पौधों को शुरुआती पोषण मिल सके।
बीज की मात्रा और बुवाई का तरीका
प्रति एकड़ 4–5 किलो बीज पर्याप्त
कतारों की दूरी: 30 सेंटीमीटर
पौधों की दूरी: 10 सेंटीमीटर
बुवाई के बाद हल्की सिंचाई अनिवार्य
इसके बाद हर 10–15 दिन में सिंचाई करें, लेकिन ध्यान रहे कि खेत में पानी न रुके, वरना जड़ें सड़ सकती हैं।
देखभाल और खाद का सही उपयोग
खरपतवार रोकने के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करने से जड़ों का आकार और रंग बेहतरीन आता है, जिससे बाजार में ज्यादा कीमत मिलती है।
फसल तैयार होने पर खुदाई सावधानी से करें ताकि जड़ें खराब न हों।
कितनी होगी पैदावार और कमाई?
एक एकड़ में चुकंदर की 150–180 क्विंटल तक उपज मिल जाती है।
उत्पादन लागत लगभग 20–25 हजार रुपये आती है।
बाजार में चुकंदर का भाव 8–12 रुपये प्रति किलो रहता है।
इस तरह किसान प्रति एकड़ 80 हजार से 1 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।












