Crop Damage Compensation (पानीपत) : पानीपत जिले में भारी बारिश और बाढ़ के कारण किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में जलभराव ने धान, सब्जियों और अन्य फसलों को तबाह कर दिया। सरकार ने किसानों की मदद के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल शुरू किया है, जहां फसल खराबे के मुआवजे के लिए आवेदन किया जा सकता है।
आज, 15 सितंबर 2025, इस पोर्टल पर आवेदन करने का आखिरी दिन था। अब तक जिले के 136 गांवों के 812 किसानों ने 6,775.659 एकड़ फसल खराब होने का दावा करते हुए मुआवजे के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। मुआवजे के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी है। नुकसान में 70% धान, 20% सब्जियां और 10% अन्य फसलें शामिल हैं।
कहां हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?
इस साल बारिश पिछले साल की तुलना में 48% ज्यादा हुई, जिसके कारण निचले इलाकों में जलभराव से फसलों को भारी नुकसान हुआ। खासकर धान की अगेती फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई, क्योंकि जमीन बिछने से दाने काले पड़ गए, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ा।
इसराना ब्लॉक में जलभराव की स्थिति सबसे खराब रही, जिसके कारण यहां के किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इसके अलावा, यमुना नदी में बाढ़ ने सनौली और बापौली इलाकों की फसलों को भी बर्बाद किया। प्रभावित गांवों में मतलौडा के नैन, कवी, वैसर, बापौली के संजौली, सनौली खुर्द, इसराना के कैथ, जौंधन कला, और समालखा के राक्सेड़ा, देहरा जैसे गांव शामिल हैं।
Crop Damage: सर्वे शुरू, मुआवजा जल्द
कानूनगो सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि 15 सितंबर तक किसान ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद 16 सितंबर से खेतों में सर्वे शुरू होगा। सर्वे टीम फसलों के नुकसान की जांच करेगी और फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड करेगी। ज्यादातर आवेदन धान की फसल के लिए आए हैं।
इसराना ब्लॉक में 436 किसानों ने 3,413 एकड़, बापौली में 128 किसानों ने 1,097 एकड़, और मतलौडा में 123 किसानों ने 1,125 एकड़ फसल खराब होने का दावा किया है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, ताकि किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।












