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देसी गायों से दुग्ध उत्पादन में किसानों की आय कैसे बढ़ रही है

On: January 9, 2026 7:00 PM
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देसी गायों से दुग्ध उत्पादन और खेती में बढ़ती किसानों की आय
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देश में खेती की बढ़ती लागत और अस्थिर आमदनी के बीच अब किसान दुग्ध उत्पादन को आय का मजबूत सहारा बना रहे हैं। इसी कारण थारपारकर, गिर और देओनी जैसी देसी गायों की मांग लगातार बढ़ रही है। ये नस्लें कम खर्च में पालन योग्य हैं और स्थानीय मौसम में आसानी से ढल जाती हैं।

देसी गायों की मांग क्यों बढ़ रही है

पिछले कुछ वर्षों में पशुपालन किसानों के लिए खेती का पूरक नहीं बल्कि एक स्थायी आय स्रोत बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार देसी गायों में

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है

  • कम चारे में पालन संभव होता है

  • स्थानीय जलवायु में बेहतर उत्पादन मिलता है

भारतीय पशु अनुसंधान परिषद से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि देसी नस्लें छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित विकल्प हैं।

थारपारकर गाय की खासियत

गर्म इलाकों में भरोसेमंद नस्ल

थारपारकर गाय की उत्पत्ति राजस्थान के थार मरुस्थलीय क्षेत्र में मानी जाती है। यह नस्ल अत्यधिक गर्मी और कम बारिश वाले क्षेत्रों में भी अच्छे से जीवित रहती है।

मुख्य लाभ

मल्टी वैरायटी मैंगो फार्मिंग : एक ही पेड़ पर उगेंगे दशहरी, लंगड़ा और चौसा, किसानों के लिए कमाल की है यह तकनीक
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  • मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता

  • पशु चिकित्सा खर्च कम

  • प्रतिदिन औसतन 15 से 18 लीटर दूध उत्पादन

राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में इस नस्ल को तेजी से अपनाया जा रहा है।

गिर गाय का दूध और बाजार मांग

A2 दूध के कारण लोकप्रिय

गिर गाय गुजरात के गिर और काठियावाड़ क्षेत्र की प्रसिद्ध देसी नस्ल है। यह गाय अपने A2 श्रेणी के दूध के लिए जानी जाती है, जिसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।

गिर गाय की विशेषताएं

  • औसतन 6 से 10 लीटर दूध प्रतिदिन

  • शांत स्वभाव और आसान देखभाल

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  • जैविक और आयुर्वेदिक उत्पादों में दूध का उपयोग

पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि A2 दूध की बढ़ती मांग के चलते गिर गाय किसानों को बेहतर कीमत दिला सकती है।

देओनी गाय से खेती और दूध दोनों में फायदा

दोहरे उपयोग वाली देसी नस्ल

देओनी गाय का विकास महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के सीमावर्ती क्षेत्रों में हुआ है। यह नस्ल दूध उत्पादन के साथ खेती के कामों में भी सहायक है।

देओनी गाय के फायदे

  • मजबूत शरीर और अच्छी सहनशक्ति

  • प्रतिदिन 4 से 8 लीटर दूध उत्पादन

  • सालाना लगभग 1500 लीटर दूध देने की क्षमता

खेती और पशुपालन को साथ करने वाले किसानों के लिए यह नस्ल उपयोगी मानी जाती है।

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किसानों की आमदनी पर असर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिन किसानों ने देसी गायों को अपनाया है, उनकी दुग्ध उत्पादन से आय में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही जैविक खाद और गोबर आधारित उत्पादों से अतिरिक्त कमाई के अवसर भी बढ़े हैं।

आगे क्या है किसानों के लिए

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में

  • देसी नस्लों पर सरकारी योजनाएं बढ़ेंगी

  • A2 दूध का बाजार और मजबूत होगा

  • छोटे किसानों को स्थायी आय के नए रास्ते मिलेंगे

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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