ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

गेहूं के दाम MSP के करीब पहुंचे, बंपर फसल के संकेत से बाजार में नरमी

On: January 9, 2026 8:29 AM
Follow Us:
गेहूं के दाम MSP के करीब पहुंचे, बंपर फसल के संकेत से बाजार में नरमी
Join WhatsApp Group

देश के थोक बाजारों में गेहूं की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है। बीते कुछ वर्षों से जो गेहूं MSP से ऊपर बिक रहा था, वह अब दोबारा न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास पहुंच गया है। इसकी बड़ी वजह रबी सीजन में बुवाई का बढ़ा हुआ रकबा और बंपर उत्पादन की मजबूत संभावना मानी जा रही है। सरकारी आंकड़े और बाजार ट्रेंड दोनों ही इस ओर इशारा कर रहे हैं कि नई फसल आने के बाद भाव MSP के बहुत करीब रह सकते हैं।

MSP और मौजूदा बाजार भाव की स्थिति

फिलहाल बाजार में पुराने गेहूं की खरीद बिक्री 2425 रुपये प्रति क्विंटल के MSP के आसपास हो रही है। वहीं सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026 27 के लिए गेहूं का MSP बढ़ाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया है, जो अप्रैल से लागू होगा।

मंडी विशेषज्ञों का कहना है कि जिस रफ्तार से कीमतें नीचे आ रही हैं, उससे संकेत मिल रहा है कि नई फसल की आवक के समय बाजार भाव और MSP के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा।

क्यों गिर रहे हैं गेहूं के दाम

गेहूं की कीमतों में नरमी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं

  • रबी सीजन में बुवाई का रकबा बढ़ा

  • मौसम अब तक फसल के अनुकूल रहा

  • रिकॉर्ड या उसके आसपास उत्पादन का अनुमान

  • निर्यात पर लगा प्रतिबंध अभी हटने के आसार नहीं

कृषि बाजार विश्लेषकों के अनुसार जब सप्लाई मजबूत रहती है और निर्यात के रास्ते बंद होते हैं, तो घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बनना स्वाभाविक है।

तीन महीनों में दिखा साफ ट्रेंड

देश के थोक बाजारों के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि गेहूं के दाम ऊंचे स्तर से नीचे आ रहे हैं।

मल्टी वैरायटी मैंगो फार्मिंग : एक ही पेड़ पर उगेंगे दशहरी, लंगड़ा और चौसा, किसानों के लिए कमाल की है यह तकनीक
मल्टी वैरायटी मैंगो फार्मिंग : एक ही पेड़ पर उगेंगे दशहरी, लंगड़ा और चौसा, किसानों के लिए कमाल की है यह तकनीक
  • अक्टूबर 2025 में औसत भाव करीब 2684 रुपये प्रति क्विंटल

  • नवंबर 2025 में यह बढ़कर 2723 रुपये हुआ

  • दिसंबर 2025 में कीमत घटकर 2676 रुपये प्रति क्विंटल रह गई

सिर्फ एक महीने में करीब 47 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई।

बड़े उत्पादक राज्यों में ज्यादा असर

राज्यवार आंकड़ों से पता चलता है कि गेहूं उत्पादन वाले प्रमुख राज्यों में कीमतों की कमजोरी ज्यादा दिखी है।

  • उत्तर प्रदेश में मासिक आधार पर लगभग 2.6 प्रतिशत की गिरावट

  • पंजाब में करीब 3.6 प्रतिशत की कमी

  • बिहार और गुजरात में 2 से 4 प्रतिशत तक की नरमी

यह संकेत देता है कि जहां सप्लाई ज्यादा है, वहां कीमतों पर दबाव भी अधिक है।

सालाना तुलना में भी दाम नीचे

अगर साल दर साल तुलना करें तो तस्वीर और साफ हो जाती है।

यूरिया के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं, सरकार ला रही नई डिजिटल सुविधा
यूरिया के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं, सरकार ला रही नई डिजिटल सुविधा

दिसंबर 2024 में देशभर में गेहूं का औसत थोक भाव करीब 2870 रुपये प्रति क्विंटल था। दिसंबर 2025 में यह घटकर 2676 रुपये रह गया। यानी राष्ट्रीय स्तर पर करीब 7 प्रतिशत की गिरावट

मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में यह गिरावट 10 से 15 प्रतिशत तक रही, जबकि उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल कुछ अपवाद रहे।

सरकार और बफर स्टॉक की रणनीति

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और अप्रैल के बीच कीमतों का MSP के पास रहना सरकार के लिए भी अहम होता है। इससे

  • सरकारी खरीद आसान होती है

  • बफर स्टॉक मजबूत किया जा सकता है

  • महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलती है

हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि इस प्रक्रिया में किसानों को बेहतर बाजार भाव नहीं मिल पाता।

तापमान को लेकर चिंता कितनी बड़ी

मौसम विभाग के अनुसार जनवरी के अंत में तापमान सामान्य से ऊपर जा सकता है, जिससे गेहूं की गुणवत्ता को लेकर कुछ चिंता बनी है। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि

  • करीब 75 प्रतिशत क्षेत्र में गर्मी सहने वाली किस्में बोई गई हैं

  • पिछले साल भी गर्मी का बड़ा असर नहीं पड़ा था

    हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, खेतों की मिट्टी जांचने के लिए 2.5 करोड़ की लागत से आएंगी आधुनिक किट
    हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, खेतों की मिट्टी जांचने के लिए 2.5 करोड़ की लागत से आएंगी आधुनिक किट

इसलिए फिलहाल उत्पादन को लेकर भरोसा बना हुआ है।

आगे क्या हो सकता है

अगर मौसम सामान्य रहता है और उत्पादन अनुमान के मुताबिक होता है, तो

  • सप्लाई बनी रहेगी

  • नई फसल की आवक बढ़ेगी

  • गेहूं के दाम MSP के आसपास या थोड़ा नीचे रह सकते हैं

इसका सीधा असर किसानों की आय और सरकारी खरीद नीति दोनों पर पड़ेगा।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment