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Dhan ki fasal: धान की फसल में उर्वरक का सही प्रयोग कैसे करें? जानिए वैज्ञानिक तरीका

On: अगस्त 3, 2025 2:31 अपराह्न
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Dhan ki fasal: धान की फसल में उर्वरक का सही प्रयोग कैसे करें? जानिए वैज्ञानिक तरीका
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Dhan ki fasal: How to use fertilizers correctly in paddy crop? Know the scientific method: (धान की फसल में उर्वरक का सही प्रयोग) न करने से फसल को नुकसान पहुंचता है। जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि किसान अक्सर बिना सोच-समझ के ज्यादा उर्वरक डाल देते हैं। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता घटती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। सही मात्रा में और सही समय पर उर्वरक देने से धान की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

धान की खेती में तीन प्रमुख उर्वरक जरूरी होते हैं—(nitrogen in rice farming), (phosphorus for paddy), और (potash for rice)। प्रति हेक्टेयर औसतन 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश की जरूरत होती है। हालांकि, यह मात्रा मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की किस्म पर निर्भर करती है।

मृदा परीक्षण से तय करें उर्वरक की मात्रा Dhan ki fasal

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किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक योजना बनाएं। इससे खेत की वास्तविक जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। धान की नर्सरी में प्रति एकड़ 10 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करें। रोपाई के समय फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा बेसल डोज़ के रूप में दें।

बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर भागों में बाँटकर पहली बार रोपाई के 20-25 दिन बाद और दूसरी बार 40-45 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें। यह तरीका (paddy top dressing) कहलाता है और उपज बढ़ाने में मदद करता है।

सिंचाई के बाद करें यूरिया का छिड़काव

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(soil testing for rice) के अनुसार उर्वरक का प्रयोग करने से पौधों की जड़ों तक पोषक तत्व आसानी से पहुंचते हैं। यूरिया का छिड़काव वर्षा से पहले या सिंचाई के तुरंत बाद करें, ताकि नाइट्रोजन का नुकसान न हो। उर्वरक को हमेशा मिट्टी में मिलाकर दें, जिससे पौधों को पूरा लाभ मिल सके।

वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रति एकड़ 4 किलोग्राम उर्वरक का प्रयोग पर्याप्त होता है। इससे लागत कम होती है और उपज अधिक मिलती है। (balanced fertilizer use) से न केवल फसल स्वस्थ रहती है, बल्कि किसान को आर्थिक लाभ भी होता है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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