ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Dhan ki kheti: धान में खैरा रोग: जानिए लक्षण, कारण और बचाव के आसान उपाय, वरना बर्बाद हो सकती है पूरी फसल

On: अगस्त 3, 2025 11:48 पूर्वाह्न
Follow Us:
Dhan ki kheti: धान में खैरा रोग: जानिए लक्षण, कारण और बचाव के आसान उपाय, वरना बर्बाद हो सकती है पूरी फसल
Join WhatsApp Group

Dhan ki kheti: Khaira disease in paddy: Know the symptoms, causes and easy ways to prevent it, otherwise the entire crop may get ruined: (धान में खैरा रोग का इलाज) की जानकारी किसानों के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि यह रोग फसल को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है। कृषि विशेषज्ञ शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि यह रोग मिट्टी में (Zinc deficiency in rice) के कारण होता है। जब खेत की मिट्टी में जिंक की मात्रा कम हो जाती है, तो धान की फसल पर इसका असर दिखने लगता है।

इसके अलावा, जब मिट्टी में कैल्शियम और अल्कलाइन तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है, तो जिंक की उपलब्धता और भी घट जाती है। लगातार एक ही खेत में धान, मक्का और गन्ना जैसी हाई इंटेंसिटी फसलें उगाने से भी मिट्टी की गुणवत्ता गिरती है और (Rice crop disease) फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

खैरा रोग के लक्षण पहचानें Dhan ki kheti

हरियाणा में मधुमक्खी पालन पर बीमा सुरक्षा लागू, 50 रुपये में मिलेगा 1250 रुपये तक का क्लेम | haryana-mukhyamantri-bagwani-bima-yojana-beekeeping-insurance-claim
हरियाणा में मधुमक्खी पालन पर बीमा सुरक्षा लागू, 50 रुपये में मिलेगा 1250 रुपये तक का क्लेम

(Khaira disease in paddy) के लक्षण शुरुआत में पत्तियों पर हल्के पीले धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे ये धब्बे कत्थई रंग में बदल जाते हैं। पौधा बौना हो जाता है और उसकी जड़ें भी कत्थई रंग की हो जाती हैं। यह संकेत है कि फसल गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी है।

ऐसे में किसान को तुरंत मिट्टी का परीक्षण कराना चाहिए ताकि (Soil nutrient deficiency) का पता चल सके। समय पर पहचान और उपचार से फसल को बचाया जा सकता है।

बचाव के आसान और असरदार उपाय

गेहूं-सरसों की बिजाई पर नहीं होगी डीएपी की किल्लत, हरियाणा पहुंचा खाद का नया रैक | haryana-fertilizer-supply-dap-urea-rabi-crops-wheat-mustard-sowing
गेहूं-सरसों की बिजाई पर नहीं होगी डीएपी की किल्लत, हरियाणा पहुंचा खाद का नया रैक

शिव शंकर वर्मा के अनुसार, (Rice disease treatment) के लिए सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करें और प्रति हेक्टेयर 25 किलो जिंक सल्फेट मिट्टी में मिला दें। इसके बाद 0.5% जिंक सल्फेट और 0.2% बुझा चूना को पानी में घोलकर हर 10 दिन में तीन बार छिड़काव करें।

अगर चूना उपलब्ध न हो तो 2% यूरिया का भी प्रयोग किया जा सकता है। यह उपाय (Zinc sulfate for rice) की कमी को पूरा करता है और फसल को खैरा रोग से बचाता है। साथ ही, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर मिट्टी की जांच कराते रहें ताकि पोषक तत्वों की कमी का पता चल सके।

औषधीय पौधों की खेती कैसे शुरू करें? जानिए शतावर, मूसली और मेंथा का सटीक बाजार भाव | medicinal-plants-farming-shatavari-mentha-ashwagandha-profit-cost-market-rate
औषधीय पौधों की खेती कैसे शुरू करें? जानिए शतावर, मूसली और मेंथा का सटीक बाजार भाव

भारत मेहंदीरत्ता

भारत मेहंदीरत्ता एक अनुभवी पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 11 वर्षों से ऑटो और क्रिकेट से जुड़ी खबरों पर रोचक और तथ्यपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की नवीनतम जानकारियों, जैसे कार-बाइक लॉन्च, प्राइस अपडेट्स, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, के साथ-साथ क्रिकेट की दुनिया की रोमांचक खबरों, जैसे मैच अपडेट्स, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टूर्नामेंट विश्लेषण को कवर करती हैं। भारत का लेखन शैली जीवंत, गहन और पाठक-केंद्रित है, जो ऑटो और क्रिकेट प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment