भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की मजबूती सबसे अहम आधार मानी जा रही है। देश की लगभग 46 प्रतिशत आबादी आज भी खेती पर निर्भर है, इसलिए किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाए बिना विकास की कल्पना अधूरी मानी जाती है। नीति आयोग के अनुसार, छोटे और सीमांत किसानों के लिए आधुनिक तकनीक ही वह रास्ता है जो कम संसाधनों में अधिक उत्पादन संभव बना सकता है।
खेती क्यों है विकसित भारत की सबसे बड़ी कड़ी
भारत में करीब 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं, जिनके पास एक हेक्टेयर से कम भूमि है। ऐसे किसानों के लिए महंगी मशीनें और पारंपरिक तकनीकें व्यवहारिक नहीं रह जातीं। यही वजह है कि नीति आयोग अब फ्रंटियर टेक्नोलॉजी यानी अत्याधुनिक तकनीकों पर जोर दे रहा है।
कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि
कम पानी और कम खाद में बेहतर पैदावार
फसल की बर्बादी में कमी
किसानों की लागत में सीधी कटौती
यही तीन लक्ष्य भारत को कृषि में आत्मनिर्भर बना सकते हैं।
डिजिटल कृषि मिशन 2.0 से क्या बदलेगा
नीति आयोग के मुताबिक डिजिटल कृषि मिशन 2.0 खेती को पारंपरिक ढांचे से निकालकर डेटा आधारित सिस्टम में बदलेगा। यह मिशन तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है।
आधुनिक डिजिटल ढांचा
खेत से जुड़ा डेटा एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा।
इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा
नई तकनीकों को प्रयोगशालाओं से निकालकर खेतों तक पहुंचाया जाएगा।
सरकारी और निजी साझेदारी
स्टार्टअप्स, कंपनियां और सरकार मिलकर समाधान तैयार करेंगी।
कृषि कोष से मिलेगा सटीक और भरोसेमंद डेटा
इस मिशन के तहत कृषि कोष नाम से एक डिजिटल भंडार तैयार किया जा रहा है। इसमें मिट्टी, मौसम, फसल और बाजार से जुड़ा डेटा एक जगह उपलब्ध रहेगा।
इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा
मिट्टी के अनुसार फसल सलाह
सही समय पर सिंचाई और खाद की जानकारी
फसल बीमा और कृषि ऋण की प्रक्रिया होगी आसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डेटा आधारित खेती से किसानों की आय में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।
मोबाइल और एआई बनेंगे किसानों के नए साथी
भारत में फिलहाल एक कृषि विशेषज्ञ पर करीब 1100 किसानों की जिम्मेदारी है। इस अंतर को भरने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जा रहा है।
अब किसान
मोबाइल से फसल की तस्वीर भेजकर बीमारी पहचान सकेंगे
स्थानीय भाषा में एआई चैटबॉट से सलाह ले सकेंगे
किसान कॉल सेंटर से तुरंत समाधान पा सकेंगे
नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जब सलाह खेत की स्थिति के अनुसार होगी, तभी किसान तकनीक को अपनाने में भरोसा करेंगे।
ड्रोन दीदी और ग्रामीण युवाओं की नई भूमिका
ड्रोन दीदी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को ड्रोन संचालन और स्मार्ट मशीनों की ट्रेनिंग दी जा रही है। ये प्रशिक्षित लोग गांवों में तकनीक और किसान के बीच सेतु बनेंगे।
इसके फायदे
कम लागत में स्प्रे और निगरानी
युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में बढ़ोतरी
एग्रीटेक स्टार्टअप्स से खुलेगा विकास का रास्ता
भारत में आज 1900 से अधिक एग्रीटेक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जो ड्रोन, सेंसर और मोबाइल ऐप के जरिए खेती को सरल बना रहे हैं। सरकार इन्हें आगे बढ़ाने के लिए एक्सेलेरेटर सिस्टम को मजबूत कर रही है।
साथ ही
लंबे समय के निवेश यानी पेशेंट कैपिटल को बढ़ावा
छोटे किसानों के लिए सस्ती और किराए पर मिलने वाली मशीनें
ग्रामीण इलाकों में नए उद्योग और रोजगार
भविष्य की खेती के लिए नई शिक्षा और कौशल
1960 की हरित क्रांति सरकारी शोध पर आधारित थी, लेकिन आज जरूरत है सरकारी और निजी सहयोग की। इसी सोच के तहत
स्कूल और कॉलेज के कृषि पाठ्यक्रम बदले जा रहे हैं
नेशनल एग्री टैलेंट फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है
उत्कृष्टता केंद्रों में सूखा सहनशील बीज और जल बचत तकनीक पर काम हो रहा है
भविष्य की खेती में ड्रोन ऑपरेटर, डेटा विश्लेषक और एग्री बिजनेस विशेषज्ञ अहम भूमिका निभाएंगे।
तकनीक के साथ सुरक्षा और भरोसे की व्यवस्था
नई तकनीकों के साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए सरकार
पॉलिसी फोरसाइट यूनिट बना रही है
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के तहत तकनीकों की पहले जांच होगी
इससे यह सुनिश्चित होगा कि तकनीक किसानों तक पहुंचने से पहले सुरक्षित और भरोसेमंद हो।
क्यों यह बदलाव भारत के लिए जरूरी है
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि 2047 तक भारत का विकसित बनना तभी संभव है, जब किसान तकनीकी रूप से सक्षम और आर्थिक रूप से मजबूत होगा। डिजिटल कृषि मिशन उसी दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है।













