Farming technique: Farming with scaffolding method: There will be bumper income even in rain, government is giving 50% subsidy: मचान विधि से खेती (machan farming technique) अब किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। खासकर वर्षा ऋतु में जब मिट्टी में नमी बढ़ जाती है और कद्दूवर्गीय सब्जियों के फल जमीन से सटकर सड़ने लगते हैं, तब यह तकनीक फसल को सुरक्षित रखने में मदद करती है।
जौनपुर जिले की जिला उद्यान अधिकारी डॉ. सीमा सिंह राणा के अनुसार, इस विधि से न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि गुणवत्ता भी बेहतर होती है। किसान करेले, लौकी, खीरा और नेनुआ जैसी सब्जियों को मचान पर चढ़ाकर उगा सकते हैं, जिससे फल जमीन से ऊपर रहते हैं और सड़ने का खतरा खत्म हो जाता है। (rainy season farming)
कैसे बनता है मचान और क्या हैं इसके फायदे? Farming technique
मचान विधि में खेत में बांस गाड़कर उन पर लकड़ियां या सूखी टहनियां बांधकर एक जालीदार ढांचा तैयार किया जाता है। पौधे इस ढांचे पर फैलते हैं और फल हवा व धूप में रहते हैं। इससे उनका आकार अच्छा होता है और जल्दी पकते हैं। (machan farming structure)
इससे किसानों को बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं और आमदनी बढ़ती है। डॉ. राणा बताती हैं कि थोड़ी सी सावधानी और वैज्ञानिक तरीका अपनाकर किसान बारिश में भी भरपूर उत्पादन ले सकते हैं। (scientific farming method)
सरकार दे रही है 50% तक अनुदान
जौनपुर जिले में उद्यान विभाग ने इस विधि को मिशन योजना में शामिल किया है। इसके तहत 40 हेक्टेयर क्षेत्र में मचान विधि से खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 30 हेक्टेयर सामान्य किसानों और 10 हेक्टेयर अनुसूचित जाति के किसानों के लिए आरक्षित है। (machan farming subsidy)
इस योजना का लाभ पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगा। किसान http://dbt.uphorticulture.in/ पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं या सीधे उद्यान विभाग से संपर्क कर सकते हैं। (UP horticulture subsidy)
यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में एक अहम कदम है। (farming income increase)













