Grand start of Horticultural College in Mizoram: Shivraj Singh opened a new door of development: मिजोरम के थेनजोल में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया, जब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बागवानी महाविद्यालय (horticulture college) के दो नए भवनों का वर्चुअल उद्घाटन (virtual inauguration) किया।
यह आयोजन मिजोरम के किसानों और छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया है। इस अवसर पर आयोजित बागवानी प्रदर्शनी (horticulture exhibition) में 1500 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने अपनी अनूठी फसलों को प्रदर्शित किया। खराब मौसम के बावजूद, कार्यक्रम का उत्साह कम नहीं हुआ, और मिजोरम के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इसे और यादगार बना दिया। यह पहल पूर्वोत्तर भारत के कृषि विकास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है।
बागवानी महाविद्यालय का वर्चुअल उद्घाटन Horticultural College in Mizoram
शिवराज सिंह चौहान ने अपने पूर्वोत्तर भारत दौरे की शुरुआत मिजोरम से की। उन्होंने थेनजोल में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के तहत संचालित बागवानी महाविद्यालय (horticulture college) के दो नए भवनों—प्रशासनिक सह अकादमिक भवन और पारगमन भवन—का उद्घाटन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया।
खराब मौसम के कारण वे हेलीकॉप्टर से स्थल पर नहीं पहुंच सके, लेकिन वर्चुअल उद्घाटन (virtual inauguration) के जरिए उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। अपने संदेश में उन्होंने माफी मांगते हुए कहा, “मैं आज थेनजोल आने वाला था, लेकिन मौसम की खराबी ने मुझे रोक दिया। इसके लिए मैं आपसे क्षमा मांगता हूं।” उनका यह मानवीय रवैया लोगों के दिलों को छू गया।
बागवानी प्रदर्शनी का जोश
इस उद्घाटन के साथ-साथ आयोजित बागवानी प्रदर्शनी (horticulture exhibition) मिजोरम के किसानों के लिए एक बड़ा मंच साबित हुई। 1500 से अधिक किसानों ने इसमें हिस्सा लिया और अपनी फसलों जैसे पैशन फ्रूट, अदरक, हल्दी, गोभी, बैंगन, और टमाटर को प्रदर्शित किया।
यह प्रदर्शनी न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक बाजार में मिजोरम की कृषि उपज की मांग को उजागर करने का अवसर बनी। किसानों का उत्साह देखते ही बनता था, और यह आयोजन मिजोरम की कृषि क्षमता को सामने लाने में कामयाब रहा।
पूर्वोत्तर भारत का विकास: मोदी का संकल्प
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर भारत के विकास के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, “विकसित भारत के लिए विकसित मिजोरम जरूरी है, और विकसित मिजोरम के लिए समृद्ध किसान और आधुनिक खेती अनिवार्य है।”
उन्होंने मिजोरम की अनूठी फसलों की तारीफ की और बताया कि इन फसलों की मांग न केवल भारत, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी है। चौहान ने जोर देकर कहा कि सरकार इन फसलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार (global market) तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। यह बयान मिजोरम के किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया।
मिजोरम की फसलों को वैश्विक पहचान
मिजोरम की फसलें अपनी गुणवत्ता और विशिष्टता के लिए जानी जाती हैं। चौहान ने कहा, “यहां के फूलों की सुगंध और फसलों की खासियत पूरी दुनिया को आकर्षित करती है।
अब समय है कि इन फसलों को मिजोरम तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इनकी मार्केटिंग और ब्रांडिंग के जरिए वैश्विक स्तर पर ले जाया जाए।” उन्होंने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया। यह दृष्टिकोण मिजोरम के कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) वी.के. सिंह, मुख्यमंत्री पु. लालदुहोमा, और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अनुपम मिश्रा उपस्थित थे।
सभी ने इस पहल को मिजोरम की कृषि शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक मील का पत्थर बताया। राज्यपाल ने कहा कि ये नए भवन न केवल शिक्षा को बढ़ावा देंगे, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने में भी मदद करेंगे। मुख्यमंत्री ने इसे मिजोरम के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया।
मिजोरम के किसानों का भविष्य
यह बागवानी महाविद्यालय (horticulture college) मिजोरम के किसानों और छात्रों के लिए एक नया अवसर लेकर आया है। नए भवनों से शिक्षा और अनुसंधान की सुविधाएं बढ़ेंगी, जिससे किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकें सीखने का मौका मिलेगा।
बागवानी प्रदर्शनी (horticulture exhibition) ने यह साबित किया कि मिजोरम की फसलें वैश्विक बाजार (global market) में अपनी जगह बना सकती हैं। स्थानीय किसान रमेश लाल ने कहा, “यह आयोजन हमें गर्व महसूस कराता है। अब हमारी फसलें दुनिया तक पहुंचेंगी, और हमारी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा।”
कृषि शिक्षा का नया युग
यह उद्घाटन मिजोरम में कृषि शिक्षा के एक नए युग की शुरुआत है। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के तहत ये भवन न केवल अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण और नवीन तकनीकों से जोड़ने में भी मदद करेंगे। यह पहल मिजोरम को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
शिवराज सिंह चौहान का यह प्रयास न केवल मिजोरम, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह आयोजन मिजोरम के किसानों के लिए एक नई उम्मीद और विकास की राह खोलता है।













