Green Chilli Farming : भारत में हरी मिर्च सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाती, बल्कि किसानों की जेब भी भर रही है। अचार से लेकर सब्जी तक, हर डिश में हरी मिर्च की मांग सालभर रहती है। यही वजह है कि किसान अब पारंपरिक फसलों को छोड़कर हरी मिर्च की उन्नत खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
कम लागत और ज्यादा मुनाफे के कारण यह फसल किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। आइए जानते हैं हरी मिर्च की खेती का सही तरीका और उन टॉप उन्नत किस्मों के बारे में, जो किसानों को मालामाल बना रही हैं।
उन्नत किस्में, ज्यादा मुनाफा Green Chilli Farming
किसान यदि उन्नत किस्मों की खेती करें, तो बेहतर गुणवत्ता और ज्यादा उत्पादन के साथ बाजार में अच्छा दाम मिल सकता है। कुछ शानदार किस्में हैं:
पूसा ज्वाला: रोगों से लड़ने में माहिर और ज्यादा फल देने वाली किस्म।
अर्का हरिता: मौसम के हिसाब से ढलने वाली, लंबे समय तक फल देती है, जिससे मुनाफा बढ़ता है।
अर्का सुप्रिया: कीटों से बचाव और चमकदार मिर्च, जो बाजार में खूब पसंद की जाती है।
काशी अनुशा: सबसे लोकप्रिय, प्रति हेक्टेयर 150-200 क्विंटल तक उपज देती है।
काशी सुधा और गौरव-21: ये 20-30% ज्यादा उत्पादन देती हैं और बाजार में ऊंचा दाम पाती हैं।
खेती का सही समय और जलवायु
हरी मिर्च की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे बेहतर है। 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श है। बुवाई का समय भी मायने रखता है:
गर्मी की फसल: फरवरी से अप्रैल के बीच बुवाई करें।
बरसाती फसल: जून-जुलाई में बुवाई सबसे अच्छी रहती है।
रबी सीजन: अक्टूबर-नवंबर में रोपाई करें।
खेत की तैयारी और रोपाई का तरीका
हरी मिर्च की खेती के लिए खेत को अच्छे से तैयार करना जरूरी है। खेत को 2-3 बार गहराई से जोतें, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। प्रति बीघा 15-20 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद डालें, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाए। पौधों को 45×45 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं, ताकि उन्हें पर्याप्त धूप और हवा मिले। इससे रोगों का खतरा कम होता है और पौधे स्वस्थ रहते हैं।
कितना मुनाफा, कितनी उपज?
हरी मिर्च की उन्नत किस्मों से किसान एक हेक्टेयर में 3 लाख से 8 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। ये किस्में 70-80 दिनों में तैयार हो जाती हैं और 5-6 महीने तक लगातार फल देती हैं। प्रति हेक्टेयर 150 से 250 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है, जो बाजार में अच्छा दाम दिलाता है।













