पानीपत (Haryana Agriculture News)। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान देने के लिए किसानों के चयन का ऑनलाइन ड्रा 11 नवंबर को दोपहर 12 बजे किया जाएगा। यह फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है।
उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने बताया कि विभागीय पोर्टल पर इस योजना के अंतर्गत 20 अगस्त तक किसानों से आवेदन प्राप्त किए गए थे। योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दी जाएगी। उप कृषि निदेशक डाॅ. आत्मा राम गोदारा ने बताया कि इस बार 1104 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
सहायक कृषि अभियंता सुधीर कुमार ने बताया कि बेलर मशीन के लिए चयनित किसान स्ट्रा-रेक व सर्व-मास्टर कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का लाभ उठा सकेंगे। किसी किसान के दस्तावेजों में कमी या गलत जानकारी मिली तो वे अनुदान के पात्र नहीं होंगे।
वायरस से संक्रमित फसल के मुआवजे की मांग
पानीपत। संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा जिला कमेटी जिला ने वायरस से संक्रमित फसल के मुआवजे की मांग की है। साथ ही गांवों में जलभराव का विशेष बजट जारी करने की मांग की है।
मोर्चा और सभा ने प्रदेश के किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आगे आकर आकर नायब तहसीलदार सौरभ शर्मा के मार्फत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को मांगपत्र सौंपा है।
संयुक्त किसान मोर्चा के सह संयोजक सुनील दत्त, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान डॉ. सुरेंद्र मलिक, जिला सचिव राजपाल का गाहल्याण, जिला उप प्रधान दिलावर सिंह राठी व पानीपत तहसील सचिव एसए खान सोमवार को जिला सचिवालय पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों की अनदेखी की जा रही है। जिसके चलते उनकी आय आज आज दोगुना नहीं हो पाई है। इससे कई गुना अधिक पेस्टीसाइड के रेट बढ़ गए हैं।
Haryana Agriculture News: उत्पादन अपेक्षाकृत नहीं
उन्होंने कहा कि इस बार अत्यधिक बारिश के चलते धान की फसल में जलभराव की स्थिति बनी रही। इससे फसल का उत्पादन भी अपेक्षाकृत नहीं हो पाया है। उन्होंने जल बढ़ाओ और बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिया जाएं। इसके साथ धान में वायरस से संक्रमित फसल का भी मुआवजा दिया जाए साथ ही बाढ़ के नुकसान का भी मुआवजा दिया जाए। बारिश और बाढ़ में टूटी सड़कों को तुरंत मरम्मत कराई जाएं।
गांवों में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए विशेष बजट जारी किया जाएं। भविष्य में बाढ़ से होने वाली तबाही से बचने के लिए समय पर मास्टर प्लान तैयार किया जाए और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में लागू किया जाए। धान की फसल में हुई किसानों की लूट, बाहर से आने वाले धान की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। धान की फसल में नमी 17 की बजाय बढ़ाकर 22 प्रतिशत किया जाए। बारिश, ओलावृष्टि, जलभराव व आग के लंबित आर्थिक मुआवजे तुरंत जारी किए जाएं।
बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाई जाएं। गांव को इकाई मानने की शर्त हटाई जाएं। खरीफ-2025 की फसलों में कई जिलों में बीमा कंपनियों द्वारा किसानों को क्लेम ना देने के लगाई आपत्ति तुरंत हटाया जाए। प्राइवेट बीमा कंपनियों की बजाय सरकारी कंपनियों को फसल बीमा योजना में जोड़ा जाए। खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए। किसानों को खाद देने के लिए शुरू किए गए पोर्टल ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत बंद किया जाए।
पराली के नाम पर किसानों पर बनाए जा रहे मुकदमे रद्द किए जाएं। कृषि संशोधन बिल 2021 रद्द किया जाए और केंद्र के 2013 के कानून में किसानों के हितों के प्रावधानों को जोड़कर लागू किया जाएं। बेसहारा पशुओं पर रोक लगाई जाए। बिजली के लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन जल्द जारी किए जाएं। बिजली बिल 2025 और स्मार्ट मीटर योजना को रद्द किया जाएं।
अंबाला जिले में सरसों का रकबा 13 हजार एकड़
अंबाला। गेहूं बिजाई के साथ ही किसानों में सरसों की फसल को लेकर भी रुझान बढ़ा है। जिले में इस बार सरसों का रकबा बढ़ गया है। पिछले वर्ष जहां सरसों का रकबा 10 हजार एकड़ था, वहीं इस बार यह यह 13 हजार एकड़ पर पहुंच गया है। किसानों में परंपरागत खेती के साथ ही दूसरी फसलों को लेकर भी रुझान बढ़ा है, हालांकि सरसों की बिजाई पहले भी होती रही है, लेकिन यह रकबा लगातार बढ़ रहा है। अंबाला खंड वन के साथ ही नारायणगढ़ और शहजादपुर में किसानों ने सरसों को लेकर दिलचस्पी दिखाई है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी ने बताया कि जिले में सरसों का रकबा 10 हजार से बढ़कर 13 हजार एकड़ हो गया है। पहले यह रकबा कम होता था। अब इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। किसानों को लगातार फील्ड में भी जागरूक किया जा रहा है।
50 प्रतिशत हो चुकी गेहूं की बिजाई
अभी गेहूं की बिजाई का सीजन चल रहा है। जिले की बात करें तो 50 प्रतिशत से ज्यादा बिजाई हो चुकी है, जबकि यह कार्य अभी चल रहा है। गेंहू की बिजाई के दौरान मौसम में सर्दी बढ़ने का भी फायदा मिलेगा। वहीं, इस बार किसानों ने पराली नहीं जलाई है। इसको लेकर भी कृषि विभाग ने धरातल पर कार्य किया है। इसके साथ ही किसानों में भी जागरूकता आई है।













