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कैथल मंडी में लोकल सब्जियों की बंपर आवक, 20-30 फीसदी सस्ती हुईं, महंगाई से मिली राहत

On: नवम्बर 10, 2025 5:03 अपराह्न
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कैथल मंडी में लोकल सब्जियों की बंपर आवक, 20-30 फीसदी सस्ती हुईं, महंगाई से मिली राहत
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कैथल। स्थानीय सब्जियों की आवक बढ़ने से कैथल की सब्जी मंडी फिर से रौनक से भर गई है। मंडियों में दाम घटने से आम आदमी की थाली में सब्जियां लौट आई हैं। एक सप्ताह के भीतर अधिकांश सब्जियों के भावों में 20 से 30 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है।

कैथल मंडी में लोकल सब्जियों की आवक

मेथी, मूली, बैंगन, टमाटर, पालक, गाजर, फूल गोभी, बंद गोभी और मटर जैसी मौसमी सब्जियों की स्थानीय आवक शुरू हो गई है। पहले ये सब्जियां 50 से 80 रुपये किलो तक बिक रही थीं, जो अब 20 से 30 रुपये किलो तक आ गई हैं। बढ़ी हुई आवक से रसोई का खर्च कम हुआ है और लोगों को बजट में राहत मिली है।

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अगस्त में लगातार बारिश के कारण स्थानीय फसलें खराब हो गई थीं, जिससे मंडियों में सब्जियों की आपूर्ति घट गई थी और दाम आसमान छूने लगे थे। अब मौसम के सुधरने और फसल तैयार होने से बाजार में स्थिरता लौट आई है।

सब्जियों के दामों में गिरावट

गाजर: पहले 40 रुपये किलो, अब 25 रुपये किलो
मटर: पहले 200 रुपये किलो, अब 140 रुपये किलो
टमाटर: पहले 60 रुपये किलो, अब 40 रुपये किलो
फूल गोभी: पहले 40 रुपये किलो, अब 25 रुपये किलो
पेठा: पहले 30 रुपये किलो, अब 20 रुपये किलो
मूली: पहले 40 रुपये किलो, अब 20 रुपये किलो
घीया: पहले 40 रुपये किलो, अब 20 रुपये किलो
मेथी गुच्छी: पहले 30 रुपये, अब 20 रुपये

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थोक विक्रेता राकेश कुमार ने बताया कि कैथल मुख्य थोक मंडी है, जहां से आसपास के गांवों और कॉलोनियों में फुटकर विक्रेता सब्जियां ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि पहले दाम अधिक होने से ग्राहकों की खरीद कम हो गई थी, लेकिन अब दाम घटने से बिक्री भी बढ़ी है।

मंडी में सब्जी खरीदने पहुंची गृहिणी पूजा ने बताया कि अब मेथी, आलू, प्याज, टमाटर, मूली, गाजर, गोभी, पालक जैसी सब्जियां 10 से 20 रुपये किलो में मिल रही हैं। इससे परिवारों को महंगाई से बड़ी राहत मिली है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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